Hazaribagh: ग्रामीण इलाकों में रहने वाली जिले की गरीब जनता तक बुनियादी और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने तथा सरकारी योजनाओं की सुस्त रफ्तार को गति देने के लिए हजारीबाग जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है. समाहरणालय भवन के सभागार में उपायुक्त हेमंत सती की अध्यक्षता में ‘प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन’ एवं 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत जिले भर में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में मुख्य रूप से जिले के सुदूरवर्ती विभिन्न प्रखंडों में चल रहे नए स्वास्थ्य उपकेंद्रों के निर्माण, पुराने भवनों के जीर्णोद्धार और मेडिकल संसाधनों की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की गई. बैठक में उपायुक्त के साथ उप विकास आयुक्त रिया सिंह भी मुख्य रूप से मौजूद रहीं, जिन्होंने जिले के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अहम तकनीकी इनपुट साझा किए.
ग्रामीण अस्पतालों का होगा औचक निरीक्षण
बैठक के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्रों की वास्तविक जमीनी स्थिति और वहां के कामकाज की निष्पक्ष जांच के लिए उपायुक्त ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. उपायुक्त ने समाहरणालय के विभिन्न वरिष्ठ उपसमाहर्ताओं को सीधे तौर पर अलग-अलग प्रखंडों की जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें नियमित और औचक निरीक्षण करने का कड़ा निर्देश दिया है. उन्होंने साफ कहा कि इन औचक निरीक्षणों के दौरान अधिकारी मुख्य रूप से अस्पतालों में तैनात एएनएम और सीएचओ की बायोमेट्रिक और भौतिक उपस्थिति, दैनिक ओपीडी का सुचारू संचालन, जीवन रक्षक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता, ग्रामीण महिलाओं के सुरक्षित संस्थागत प्रसव की स्थिति, बिजली आपूर्ति, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सहित अन्य सभी आवश्यक मूलभूत नागरिक सुविधाओं की गहराई से जांच करेंगे. यदि कोई भी स्वास्थ्य कर्मी या डॉक्टर अपनी ड्यूटी से गायब पाया गया या दवाओं के वितरण में लापरवाही मिली, तो संबंधित के खिलाफ तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
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निर्माण कार्यों के लिए तय की गई डेडलाइन
उपायुक्त ने पीएम-अभिम और 15वें वित्त आयोग के फंड से बन रहे स्वास्थ्य उपकेंद्रों के भवन निर्माण कार्यों में हो रही लेती-लतीफी पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कार्यपालक संस्थाओं और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई..उन्होंने कड़े लहजे में निर्देश दिया कि इन दोनों महत्वपूर्ण महत्वाकांक्षी योजनाओं के अंतर्गत जितने भी निर्माण कार्य या योजनाएं वर्तमान में लंबित पड़ी हैं, उन्हें हर हाल में निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण कराया जाए. समयबद्ध कार्ययोजना का खाका खींचते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिन स्वास्थ्य भवनों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, उनका मुकम्मल उद्घाटन आगामी 15 अगस्त 2026 तक सुनिश्चित कर लिया जाए. इसके अलावा शेष बची हुई तमाम अपूर्ण और जर्जर योजनाओं को हर हाल में आगामी 15 नवंबर 2026 तक शत-प्रतिशत पूर्ण करने की अंतिम डेडलाइन निर्धारित की गई है.
बंद पड़े मेडिकल उपकरणों को चालू करने का निर्देश
ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा लाभ देने के उद्देश्य से उपायुक्त ने अस्पतालों के कबाड़खाने और स्टोर रूम में बंद पड़े अनुपयोगी व धूल फाँक रहे कीमती मेडिकल उपकरणों को अविलंब मैकेनिक बुलाकर चालू कराने का सख्त आदेश दिया, ताकि सरकारी पैसे का सही सदुपयोग हो सके. इसके साथ ही जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में वन भूमि की कानूनी अड़चनों के कारण रुके हुए स्वास्थ्य भवनों के निर्माण कार्य को गति देने के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को वन विभाग के वरीय पदाधिकारियों से व्यक्तिगत समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने का निर्देश दिया, ताकि भवनों का संचालन शीघ्र प्रारंभ कराया जा सके. बैठक के अंतिम सत्र में उपायुक्त और उप विकास आयुक्त ने सामूहिक रूप से कहा कि जिला प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक सुदृढ़ करने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है और इसके लिए सभी कल्याणकारी योजनाओं की डिजिटल और फिजिकल मॉनिटरिंग जिला मुख्यालय स्तर से लगातार की जाती रहेगी.
