Ranchi: झारखंड पुलिस के जवानों और पदाधिकारियों को मिलने वाले वर्दी और राशन भत्ते में पड़ोसी राज्य बिहार की तुलना में काफी कम है. पड़ोसी राज्य बिहार में भर्ती और राशन भत्ता झारखंड की तुलना में डबल है. इस असमानता को लेकर पुलिस महकमे के भीतर गहरा असंतोष पनप रहा है. पुलिसकर्मियों का मानना है कि वर्तमान महंगाई के दौर में मिल रहा भत्ता बेहद नाकाफी है, जिससे उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है.
बिहार की तुलना में झारखंड के पुलिसकर्मी काफी पीछे
झारखंड में एएसआई से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के अधिकारियों को सालाना मात्र 4500 रुपये वर्दी भत्ता दिया जाता है. वहीं, सिपाही और हवलदार स्तर के जवानों को साल में केवल 4000 रुपये ही मिलते हैं. इसके विपरीत, पड़ोसी राज्य बिहार में सरकार अपने पुलिसकर्मियों पर काफी उदार है. बिहार में सिपाही और हवलदार को सालाना दस हजार रुपये तथा एएसआई से इंस्पेक्टर तक के पदाधिकारियों को ग्यारह रुपये वर्दी भत्ता मिल रहा है.

महंगाई की दौर में दो हजार रुपये का राशन भत्ता मजाक
सबसे गंभीर स्थिति राशन भत्ते को लेकर है. झारखंड में सभी रैंक के पुलिसकर्मियों को प्रति माह मात्र दो हजार रुपये राशन भत्ता दिया जाता है. पुलिस पदाधिकारियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि आज के समय में कोई भी व्यक्ति मात्र दो हजार रुपये में महीने भर का खाना कैसे खा सकता है. पुलिस की ड्यूटी 24 घंटे की होती है और शारीरिक श्रम अधिक होने के कारण उन्हें बेहतर खान-पान की आवश्यकता होती है. वहीं बिहार सरकार अपने पुलिसकर्मियों को हर महीने 3500 रुपये राशन भत्ता दे रही है.
झारखंड पुलिस एसोसिएशन से हस्तक्षेप की मांग
इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था से नाराज पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने अब अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है. पुलिसकर्मियों का कहना है कि राज्य सरकार को पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर झारखंड में भी भत्तों की समीक्षा करनी चाहिए और इसे तुरंत बढ़ाना चाहिए. पुलिस पदाधिकारियों ने झारखंड पुलिस एसोसिएशन से इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से उठाने का आग्रह किया है. संघ से मांग की गई है कि वे जल्द ही राज्य सरकार के आला अधिकारियों और मुख्यमंत्री के समक्ष इस मांग को पुरजोर तरीके से रखें, ताकि पुलिस बल के मनोबल को गिरने से बचाया जा सके.


