हजारीबाग : मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब भारत के छोटे शहरों तक महसूस किया जा रहा है. शिपिंग रूट प्रभावित होने की खबरों के बीच एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर दिक्कतें सामने आ रही हैं. हजारीबाग में घरेलू और कमर्शियल दोनों उपभोक्ताओं को गैस मिलने में देरी हो रही है, जिसके कारण कई लोग मजबूरी में फिर से कोयला और लकड़ी के चूल्हे की ओर लौटने लगे हैं. सरकार ने जमाखोरी और पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए एलपीजी बुकिंग की न्यूनतम अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है. हालांकि कई उपभोक्ता इसे सप्लाई संकट का संकेत मान रहे हैं.

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होटल-ढाबों में फिर जलने लगे पारंपरिक चूल्हे
शहर की एलपीजी एजेंसियों पर इन दिनों लंबी कतारें देखी जा रही हैं. खासकर होटल, ढाबा और छोटे फूड स्टॉल संचालक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि कमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता कम हो गई है. कई रेस्टोरेंट संचालकों ने बताया कि पहले 15-20 दिनों में सिलेंडर मिल जाता था, लेकिन अब 25 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है. मजबूरी में उन्होंने कोयला चूल्हे का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. इसी बीच बाजार में कोयले की मांग भी तेजी से बढ़ गई है और स्थानीय विक्रेताओं के अनुसार पिछले एक सप्ताह में बिक्री लगभग दोगुनी हो गई है. केंद्र सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन 25 प्रतिशत बढ़ाने का निर्देश दिया है और कहा है कि असली समस्या सप्लाई नहीं बल्कि पैनिक बुकिंग है. इसके बावजूद जिला स्तर के शहरों में उपभोक्ता ऑनलाइन बुकिंग, सर्वर ओवरलोड और देर से डिलीवरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि कोयले और लकड़ी के चूल्हों की वापसी से न सिर्फ खर्च बढ़ेगा बल्कि धुएं के कारण स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी बढ़ सकती हैं.

