बोकारो: रोजगार के अभाव में परदेस गए एक और लाल की मौत, उत्तराखंड की सुरंग में कंक्रीट गिरने से गंवाई जान

Bermo: बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती ऊपरघाट क्षेत्र के बेरोजगार युवकों के लिए परदेस काल साबित हो रहा है. रोजी-रोटी...

सिलक्यारा सुरंग
सिलक्यारा सुरंग

Bermo: बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती ऊपरघाट क्षेत्र के बेरोजगार युवकों के लिए परदेस काल साबित हो रहा है. रोजी-रोटी की तलाश में घर से हजारों किलोमीटर दूर उत्तराखंड गए मोचरो निवासी 22 वर्षीय प्रवासी मजदूर नरेश गंझू की उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग हादसे में दर्दनाक मौत हो गई. घटना के संबंध में बताया गया है कि उत्तरकाशी जिले के नेशनल हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा टनल के अंदर देर रात अंडरग्राउंड कार्य करने के दौरान कंक्रीट की चाल अचानक टूटकर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से नरेश की जान चली गई. मृतक नरेश गंझू ऊपरघाट के पेंक नारायणपुर थाना अंतर्गत पोखरिया पंचायत के मोचरो स्थित नव प्राथमिक विद्यालय के समीप का रहने वाला था और अपने पिता खिरोधर गंझू का इकलौता कमाऊ पुत्र था. वह इसी वर्ष मई महीने में भोक्ता मेला के बाद उत्तराखंड के बालकोट में नवयुग कंपनी में काम करने गया था.

एक ही परिवार में दो मौतों से पसरा मातम

इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है. एक तरफ जहां गुरुवार को नरेश की मौत की खबर मिलते ही मां दुखनी देवी, बहन पूनम कुमारी सहित पूरे परिवार में चीख-पुकार मच गई, वहीं दूसरी तरफ इसी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. बुधवार की ही रात खिरोधर गंझू की 6 वर्षीय भतीजी अमिता की मौत मलेरिया से हो गई. एक ही घर में दो-दो मौतों ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है. ग्रामीणों के अनुसार, मृतक नरेश का शव शुक्रवार देर रात तक पैतृक गांव मोचरो पहुंचने की संभावना है.

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रोजगार के संकट को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश

इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर ऊपरघाट क्षेत्र में रोजगार के गंभीर संकट और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी को उजागर कर दिया है. स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि क्षेत्र से छह बार विधायक और सूबे के मंत्री रहे दिवंगत जगरनाथ महतो ने भी यहां के बेरोजगार युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं और वर्तमान विधायक का रवैया भी पहले जैसा ही उदासीन है. रोजगार की तलाश में यहां के युवा असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं. स्थानीय नीति और रोजगार के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि ऊपरघाट के नौजवान पेट पालने के लिए परदेस जाने को मजबूर हैं, जहां से लगातार उनकी मौत की खबरें आ रही हैं. कभी सुरक्षित काम के अभाव में तो कभी हादसों में इन मजदूरों की बलि चढ़ रही है, जिससे कई हंसते-खेलते परिवार उजड़ रहे हैं.

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