Patna: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने पार्टी नेतृत्व और संगठन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए. साथ ही कहा कि वर्तमान में पार्टी ऐसे लोगों से घिर गई है, जो संगठन को भीतर से कमजोर कर रहे हैं.
‘सम्मान नहीं होगा तो राजनीति मुश्किल’
इस्तीफे के बाद मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि किसी भी कार्यकर्ता के लिए सम्मान सबसे महत्वपूर्ण होता है. उनका कहना था कि जब समर्पित लोगों की बात नहीं सुनी जाती और उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाता है, तब संगठन में काम करना कठिन हो जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान अब पहले जैसा नहीं रह गया है.
तेजस्वी यादव की टीम पर उठाए सवाल
तिवारी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि पार्टी में कुछ ऐसे लोग प्रभावशाली हो गए हैं, जिन्होंने संगठन को नुकसान पहुंचाया है. उनका दावा है कि उन्होंने अपनी बात प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के सामने भी रखी, लेकिन उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव तक भी उनकी बातें पहुंचीं, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई.
‘कठिन समय में भी पार्टी के साथ खड़ा रहा’
मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उन्होंने आरजेडी के कठिन दौर में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा. लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में उन्हें प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी जैसी अहम जिम्मेदारियां मिलीं, जिन्हें उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ निभाया. उन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा और नीतियों को जनता तक पहुंचाने के लिए हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई.
आरजेडी के प्रमुख चेहरों में रही पहचान
मृत्युंजय तिवारी लंबे समय से आरजेडी का प्रमुख चेहरा रहे हैं. अपनी तेज-तर्रार शैली और मुखर वक्तव्य के कारण उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में अलग पहचान बनाई. छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले तिवारी ने संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए नेतृत्व का विश्वास हासिल किया था. लालू प्रसाद यादव के बाद तेजस्वी यादव के नेतृत्व में भी वे लगातार पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे.
बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल
मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे को बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. आगामी चुनावी माहौल के बीच उनके इस फैसले ने आरजेडी के भीतर की स्थिति को लेकर नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देता है और तिवारी की अगली राजनीतिक पारी किस दिशा में जाती है.
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