Jamtara : जिले में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और खौफनाक जरिया ढूंढ निकाला है. इस बार ठगों के निशाने पर आंगनवाड़ी केंद्र और ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ (PMMVY) की लाभार्थी गर्भवती महिलाएं हैं. शातिर अपराधियों ने न सिर्फ महिलाओं के पैसे ऐंठने की कोशिश की, बल्कि आंगनवाड़ी केंद्रों से दर्ज गर्भवती महिलाओं की निजी जानकारियां तक हैक कर ली हैं. इस मामले को लेकर आंगनवाड़ी सेविकाओं और पीड़ितों ने जामताड़ा साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है.
जिला अधिकारी बनकर किया फोन
घटना जामताड़ा प्रखंड के बेवा धनबाद केंद्र की सेविका प्रतिमा रानी मंडल और अमलाचातर केंद्र की सेविका रीना देवी से जुड़ी है. सेविकाओं के अनुसार, उनके पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया. फोन करने वाले ने खुद को जिले का वरिष्ठ अधिकारी बताया और केंद्र की लाभार्थियों का पूरा ब्योरा मांगा. ठगों ने सेविका से कहा कि लाभार्थियों के खाते में योजना के तहत मिलने वाली राशि (पहला बच्चा होने पर 5,000 और दूसरी संतान बेटी होने पर 6,000) भेजी जानी है. इसके बाद जालसाजों ने लाभार्थी या उनके पति को कॉन्फ्रेंस कॉल पर लेने का ड्रामा किया.

व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर चेहरा छिपाया, मांगे 7,000
पीड़ित लाभार्थी के पति ने बताया कि ठगों के पास उनकी पत्नी और संबंधित आंगनवाड़ी सेविका की शत-प्रतिशत सटीक जानकारी थी. फोन करने वाले ने कहा, आपके खाते में योजना के पैसे आने हैं, इसके लिए आपको अभी अपने खाते में 7,000 जमा करने होंगे. जब पीड़ित ने व्हाट्सएप कॉल के दौरान ठग का चेहरा देखना चाहा तो उसने कैमरा छिपा लिया. पीड़ित द्वारा पैसे कटने का अंदेशा जताने पर साइबर अपराधी ने उन्हें झांसा देने की कोशिश की. हालांकि, जब पीड़ित ने कड़ाई से पूछताछ शुरू की, तो ठग गाली-गलौज और धमकी देने पर उतर आया.

BLO काम में जुटीं सेविकाएं भी निशाने पर
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि साइबर ठग उन सेविकाओं को भी निशाना बना रहे हैं जो वर्तमान में राज्य में चल रहे SIR कार्य में BLO के रूप में तैनात हैं. जब सेविकाओं को अधिकारी के इस तरह के फोन पर शक हुआ, तो उन्होंने जामताड़ा प्रखंड के वास्तविक अधिकारियों से संपर्क किया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ब्लॉक या प्रशासन की ओर से ऐसा कोई फोन नहीं किया गया है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति को पैसे न दें और न ही कोई गोपनीय जानकारी या ओटीपी साझा करें.
Also Read : बिना कानूनी अधिकार के तोड़ दिया गया था दूकान, HC ने दिया 5.25 लाख मुआवजा; चतरा DC को दी जिम्मेदारी

