Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच आयोग के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है. उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब रांची में JPSC अभ्यर्थी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. खियांग्ते की गिरफ्तारी के साथ ही अब जांच की आंच आयोग के शीर्ष स्तर तक पहुंच गई है.
कौन हैं एल. खियांग्ते?
एल. खियांग्ते यानी लालबियाकतुलुआंगा खियांग्ते वरिष्ठ IAS अधिकारी रहे हैं. उन्होंने 1987 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और 1988 बैच के IAS अधिकारी बने. बिहार-झारखंड कैडर में उन्होंने करीब 36 वर्षों तक प्रशासनिक सेवा दी. अपने लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली.
खियांग्ते प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (ATI) के महानिदेशक और झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) जैसे अहम पदों पर भी रहे. सेवानिवृत्ति से ठीक पहले वे झारखंड के मुख्य सचिव के पद तक पहुंचे. इसके बाद फरवरी 2025 में उन्हें झारखंड लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया.
14वीं JPSC परीक्षा से शुरू हुआ विवाद
JPSC अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर विवादों में आ गया. अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, OMR शीट में छेड़छाड़, कुछ परीक्षा केंद्रों पर अनियमितता और आउटसोर्सिंग एजेंसी की भूमिका को लेकर सवाल उठाए.
मामला बढ़ने के बाद CID ने जांच शुरू की. जांच के दौरान JPSC मुख्यालय समेत परीक्षा से जुड़े स्थानों पर कार्रवाई की गई. इस दौरान दस्तावेज, मोबाइल, लैपटॉप, एडमिट कार्ड और OMR से जुड़ी सामग्री मिलने की बात सामने आई.
OMR से लेकर आउटसोर्सिंग तक जांच
जांच एजेंसी कथित तौर पर यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया से जुड़ी सामग्री तक किसकी पहुंच थी और परीक्षा संचालन में कहां-कहां अनियमितता हुई. आउटसोर्सिंग एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में है.
CID की कार्रवाई के बाद परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर श्वेता गुप्ता के अलावा बाहरी लोगों और आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े आरोपी भी शामिल हैं.
9 भर्ती परीक्षाओं पर पड़ा असर
JPSC विवाद का असर सिर्फ 14वीं सिविल सेवा परीक्षा तक सीमित नहीं रहा. जांच के दौरान सामने आई कथित गड़बड़ियों के बाद आयोग की प्रशासनिक और न्यायिक सेवा समेत कई भर्ती परीक्षाएं रद्द या स्थगित करनी पड़ीं. कुल 9 परीक्षाओं के प्रभावित होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ी.
इसी को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले की जांच केवल छोटे कर्मचारियों और परीक्षा से जुड़े निचले स्तर के लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि जिम्मेदारी तय करते हुए पूरे सिस्टम की जांच हो.
इस्तीफे के बाद भी नहीं थमी जांच
14वीं JPSC परीक्षा को लेकर विवाद के बीच एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को JPSC चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने ई-मेल के जरिए अपना इस्तीफा राजभवन भेजा था, जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वीकार कर लिया था.
हालांकि, पद छोड़ने के बाद भी जांच में उनका नाम और भूमिका जांच एजेंसी के रडार पर रही. CID ने उनसे कई चरणों में पूछताछ की. इसके अलावा उनके सरकारी आवास पर भी कार्रवाई की गई.
अब गिरफ्तारी ने बढ़ाई हलचल
पूछताछ और जांच के बाद अब CID ने खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया है. इससे JPSC परीक्षा विवाद ने नया मोड़ ले लिया है. लंबे समय तक प्रशासन के शीर्ष पदों पर रहे अधिकारी की गिरफ्तारी ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है.
अब जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि 14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की पूरी कड़ी कहां तक जाती है और इसमें किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है. वहीं, रांची में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की नजर भी अब CID की आगे की कार्रवाई पर टिकी है.
