टेंगाडीह स्कूल में एडमिट कार्ड की चूक ने बच्चों का किया साल बर्बाद!, 8वीं बोर्ड में एक भी छात्र नहीं पहुंचे केंद्र

सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल (नीमडीह प्रखंड) के दलमा अभयारण्य की तराई में बसे आदिवासी बहुल गांव टेंगाडीह के उत्क्रमित मध्य विद्यालय...

Tengadih school
टेंगाडीह स्कूल

सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल (नीमडीह प्रखंड) के दलमा अभयारण्य की तराई में बसे आदिवासी बहुल गांव टेंगाडीह के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में इस बार 8वीं बोर्ड परीक्षा के दिन कोई छात्र परीक्षा केंद्र पर नहीं पहुंचा. गरीब किसान परिवार के लोग दो वक्त की रोटी के लिए कमर-तोड़ मेहनत करते हैं और इस भरोसे से बच्चों को स्कूल भेजते हैं. वर्षों तक नक्सल-प्रभावित रहे गांव में शिक्षा पहुंचाने के लिए सरकार ने प्रधानाध्यापक व सहायक शिक्षकों की नियुक्तियां कीं. अभिभावकों का आरोप है कि तीन सरकारी शिक्षकों की लापरवाही से बच्चों का वर्ष बर्बाद हुआ, भविष्य पर संकट है. वे पूछ रहे हैं कौन लेगा जिम्मेदारी?

क्या है मामला?

चांडिल अनुमंडल अंतर्गत नीमडीह प्रखंड के दलमा तराई क्षेत्र स्थित आदिवासी बहुल टेंगाडीह पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय टेंगाडीह में इस वर्ष 8वीं बोर्ड परीक्षा पूरी तरह बाधित हो गई. 2 मार्च 2026 को आयोजित परीक्षा में विद्यालय का एक भी छात्र-छात्रा शामिल नहीं हो सका, जिससे अभिभावकों में भारी आक्रोश है और बच्चों का एक साल बर्बाद होने की आशंका गहरा गई है. जानकारी के अनुसार, विद्यालय के छात्रों का परीक्षा फॉर्म समय पर ‘फ्लिप’ नहीं हो सका, जिसके कारण उन्हें एडमिट कार्ड जारी नहीं हुआ. नतीजतन परीक्षा के दिन एक भी छात्र केंद्र पर नहीं पहुंचे. इस गंभीर लापरवाही को लेकर अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभाग पर सवाल उठाए हैं. अभिभावक लखीराम सिंह ने बताया कि उनकी बेटी प्रतिमा सिंह इस वर्ष 8वीं की परीक्षा नहीं दे पाने से बेहद परेशान है. “बेटी रो रही थी. अगर दोबारा परीक्षा नहीं हुई तो उसका एक साल बर्बाद हो जाएगा. इसका जिम्मेदार कौन होगा?” उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की. सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने प्रधानाध्यापक का वेतन भी अस्थायी रूप से रोक दिया है.

वहीं अभिभावकों ने मांग की है, कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द परीक्षा आयोजित कराई जाए.

उमवि टेंगाडीह में है तीन शिक्षक नियुक्त.

टेंगाडीह पंचायत एक समय घोर नक्सल प्रभावित रहा है. यहां शिक्षा के विस्तार के लिए सरकार द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, ताकि बच्चे मुख्यधारा से जुड़ सकें. बावजूद इसके इस तरह की लापरवाही से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है. अभिभावकों ने बताया कि स्कूल में तीन सरकारी शिक्षक पदस्थापित हैं, जिनका वेतन लाखों रुपये में है. इसके बावजूद पढ़ाई की स्थिति बेहद खराब है. ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल तो पहुंचते हैं, लेकिन पढ़ाई कराने में पूरी तरह विफल हैं, जिसके कारण बच्चों की शैक्षणिक स्थिति कमजोर हो गई है और वे परीक्षा देने तक नहीं पहुंच सके.

एक ही क्लास रूम में चलती है एक से आठ तक की कक्षा 

उमवि टेंगाडीह में तीन शिक्षक पदस्थापित हैं. एक से आठवीं तक करीब एक सौ छात्र-छात्राएं हैं. मंगलवार को एक ही रूम के अंदर जमीन पर बैठकर छात्र-छात्राएं पठन-पाठन कर रहे थे. छात्रों के बैठने के लिए टेबल-बेंच नहीं था. जिस कारण छात्र जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे.

प्रधानाध्यापक ने मानी चूक, विभाग ने रोकी सैलरी

विद्यालय के प्रधानाध्यापक सरसिज कुमार ने स्वीकार किया कि तकनीकी खामी और धीमी प्रक्रिया के कारण छात्रों का फॉर्म समय पर पूरा नहीं हो सका. उन्होंने बताया कि विभाग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है, जिसका जवाब दे दिया गया है. साथ ही जानकारी दी कि एक माह के भीतर विशेष परीक्षा आयोजित कर वंचित छात्रों को मौका दिया जाएगा.

कौन-कौन छात्र परीक्षा से वंचित रहे?

चित्रा सिंह, उत्तम सिंह, प्रतिमा सिंह, उर्मिला दास, जीतवाहन सिंह, चंपारानी सिंह, प्रियंका मुर्मू, वनबिहारी सिंह, सुशील हांसदा, शुभम मांझी और मनोज सिंह इस वर्ष 8वीं बोर्ड परीक्षा नहीं दे सके.

वहीं स्टूडेंट ने बताया कि, मास्टर जी ने एडमिट कार्ड नहीं बनाया. पूछने पर कहा गया कि जो एडमिट कार्ड बनाता है, उसकी मां मर गई थी, इसलिए कार्ड नहीं बन पाया, जिस कारण हम परीक्षा नहीं दे पाए.

वहीं, प्रतिमा सिंह के परिजन का कहना है कि “एडमिट कार्ड नहीं मिलने के कारण मेरी बेटी समेत गांव के कई आदिवासी बच्चे परीक्षा नहीं दे पाएं. परीक्षा इसी वर्ष होनी चाहिए, बच्चों का समय बर्बाद नहीं होना चाहिए.”

बीईओ ने कहा- परीक्षा छूटे छात्रों को मिलेगा एक और मौका

नीमडीह के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी संजय कुमार जोशी ने कहा कि उन्होंने कुछ माह पहले ही कार्यभार संभाला है और यह चूक प्रधानाध्यापक की लापरवाही से हुई. प्रधानाध्यापक को शो-कॉज किया गया है और वेतन रोक दिया गया है. परीक्षा न दे सके छात्रों को एक और मौका दिया जाएगा.

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