Chaitra Navratri 2026: छठे दिन मां कात्यायनी को ये भोग चढ़ाएं, दूर होंगे सारे कष्ट

  News Desk: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन भक्त देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की श्रद्धा से पूजा करते हैं....

 

News Desk: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन भक्त देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की श्रद्धा से पूजा करते हैं. मां कात्यायनी का रूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य माना जाता है. उनकी चार भुजाएं होती हैं और वे सिंह पर विराजमान रहती हैं, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, असुरों के अत्याचार से पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए देवी ने इसी रूप में अवतार लिया था और दुष्ट शक्तियों का अंत किया. जो भक्त सच्चे मन से मां कात्यायनी की आराधना करते हैं, उनके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा, रोग और बाधाएं दूर होने की मान्यता है. आइए जानते हैं इस दिन से जुड़ी खास बातें .

मां कात्यायनी के प्रिय भोग का खास महत्व 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को शहद अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. शहद को पवित्रता, सकारात्मक ऊर्जा और मधुरता का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि छठे दिन श्रद्धा से शहद चढ़ाने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं और व्यक्ति के स्वभाव व व्यक्तित्व में आकर्षण और सौम्यता आती है.

भोग अर्पित करने की सही विधि

  • पूजा से पहले साफ बर्तन (चांदी या तांबे का हो तो बेहतर) में शुद्ध शहद रखें.
  • मां कात्यायनी की पूजा करते समय श्रद्धा भाव से इसे उनके चरणों में अर्पित करें.
  • पूजा पूर्ण होने के बाद उसी शहद को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें.
  • फिर इसे परिवार के सदस्यों में बांटें, ताकि सभी को इसका शुभ फल प्राप्त हो सके.

पीले रंग के भोग का महत्व

मां कात्यायनी को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है, जो समृद्धि और शुभता का प्रतीक है. शहद के अलावा आप उन्हें आम, केला, बेसन के लड्डू या केसर युक्त हलवा भी अर्पित कर सकते हैं. मान्यता है कि इन पीले भोगों को अर्पित करने से विवाह में आ रही बाधाएं कम होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है साथ ही, देवी की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होने की संभावना बढ़ती है.

मां कात्यायनी का शक्तिशाली मंत्र

देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना करते समय इस मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है—

चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

भक्ति भाव से इस मंत्र का उच्चारण करने पर मां की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में शांति व सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

DISCLAIMER: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है. इसे अंतिम सत्य या दावा न मानें, कृपया अपने विवेक से निर्णय लें.

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