चाईबासा: सारंडा जंगलों में एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज गई. शनिवार सुबह करीब नौ बजे पश्चिम सिंहभूम जिले के जराइकेला थाना क्षेत्र स्थित कोलबोंगा में नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई. सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के बीच नक्सलियों की ओर से मोर्चा संभालने की कोशिश की गई, जिसका जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया. प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सुबह 9:00 बजे अचानक शुरू हुई मुठभेड़ से पूरा इलाका दहल उठा. दोनों ओर से सैकड़ों राउंड फायरिंग की खबर है. अपुष्ट खबरों के मुताबिक, इस मुठभेड़ में पहली बार सुरक्षाबलों द्वारा हेलीकॉप्टर का उपयोग कर हवाई फायरिंग की गई है. हालांकि, पुलिस प्रशासन या सीआरपीएफ की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सुरक्षाबलों ने कोलबोंगा और उसके आसपास के जंगली इलाकों को चारों ओर से सील कर दिया है ताकि नक्सलियों को भागने का मौका न मिले.
31 मार्च का अल्टीमेटम और ऑपरेशन प्रहार:
केंद्र सरकार ने नक्सलियों के पूर्ण सफाए के लिए 31 मार्च 2026 तक का कड़ा अल्टीमेटम दिया है. इसी आदेश के आलोक में सारंडा के दुर्गम इलाकों में अब तक की सबसे निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है. वर्तमान में सारंडा के जंगलों में सीआरपीएफ, कोबरा, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस के लगभग 4000 जवान तैनात हैं. नक्सलियों के बचे-खुचे गढ़ को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षाबल जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहे हैं. जवानों का अभियान अब उनके कोर जोन में प्रवेश कर चुका है. हालांकि मुठभेड़ की आधिकारिक पुष्टि और हताहतों का विवरण अभी प्रतीक्षित है, लेकिन जिस तरह से सारंडा में हलचल बढ़ी है, उससे साफ है कि सुरक्षाबल नक्सलियों को जड़ से उखाड़ने के लिए बड़े स्तर पर फाइनल टच दे रहे हैं.
