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गुमला की पांच बेटियों ने पेश की मिसाल: मां की अर्थी को दिया कंधा, बड़ी बेटी ने दी मुखाग्नि

गुमला: समाज में अक्सर यह कहा जाता है कि वंश चलाने और अंतिम संस्कार की रस्मों के लिए पुत्र का होना अनिवार्य...

गुमला: समाज में अक्सर यह कहा जाता है कि वंश चलाने और अंतिम संस्कार की रस्मों के लिए पुत्र का होना अनिवार्य है, लेकिन गुमला शहर की पांच बेटियों ने इस रूढ़िवादी सोच को एक बार फिर आइना दिखाया है. शहर के डीएसपी रोड निवासी स्वर्गीय कमासुख ओहदार (प्रख्यात अधिवक्ता) की पत्नी कौशल्या देवी (76 वर्ष) का सोमवार को निधन हो गया. उनके निधन के बाद उनकी बेटियों ने जिस तरह से अपनी मां को अंतिम विदाई दी, उसने पूरे शहर को भावुक कर दिया. सोमवार को उनके निधन की खबर फैलते ही डीएसपी रोड और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई.

बेटियों ने निभाया बेटों का फर्ज:

कौशल्या देवी को कोई पुत्र नहीं था,उनकी पांच बेटियां ही उनका संबल और सहारा थीं. मंगलवार को जब उनकी अंतिम यात्रा निकली, तो समाज के पुराने कायदे पीछे छूट गए. उनकी पांचों बेटियों नीलिमा ओहदार, विद्या ओहदार, ज्योति ओहदार, अर्चना ओहदार और अल्पना ओहदार ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया. शमशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान भी यह साहस बरकरार रहा.बड़ी बेटी नीलिमा ओहदार ने पूरे विधि-विधान के साथ अपनी मां को मुखाग्नि दी. वहां मौजूद लोगों की आंखें नम थीं, लेकिन सभी के मन में इन बेटियों के प्रति सम्मान भी था.यह पहली बार नहीं था जब इस परिवार की बेटियों ने साहस का परिचय दिया हो. इससे पूर्व जब उनके पिता स्व. कमासुख ओहदार का निधन हुआ था, तब भी इन पांचों बहनों ने ही उनकी अर्थी को कंधा दिया था और पुत्र की कमी महसूस नहीं होने दी थी.

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