विनीत आभा उपाध्याय

रांची: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के हाथ बड़ी सफलता लगी है. शराब घोटाला मामले के आरोपी और मेसर्स छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड के मालिक नवीन केडिया ने पूछताछ के दौरान राज्य के प्रभावशाली नौकरशाहों और बिचौलियों के गठजोड़ का कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया है.
नौकरशाहों और बिचौलियों के गठजोड़ का खुलासा
नवीन केडिया के बयान ने तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे और चर्चित अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी के साथ साथ विनय सिंह की भूमिका को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है. नवीन केडिया ने ACB को बताया कि झारखंड सरकार के तत्कालीन उत्पाद एवं मद्य निषेध सचिव विनय कुमार चौबे का राज्य की शराब नीति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण था.
2022 की बैठक में बनी सप्लाई नेटवर्क की रणनीति
वर्ष 2022 में नवीन केडिया की मुलाकात अरुणपति त्रिपाठी और छत्तीसगढ़ के रसूखदार शराब कारोबारी अनवर ढेबर से हुई थी. इस बैठक में झारखंड में देसी शराब की आपूर्ति के नेटवर्क को स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की गई थी. केडिया ने स्वीकार किया कि उन्हें भी इस सिंडिकेट में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था.
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विनय सिंह की मीडियेटर की भूमिका
जांच में यह भी सामने आया है कि विनय सिंह इस पूरे खेल में वित्तीय लेन-देन के लिए मीडियेटर के रूप में कार्य कर रहे थे. केडिया ने खुलासा किया है कि ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड और दिक्षिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों को थोक वितरण का कार्य सौंपा गया था. केडिया की अपनी कंपनी छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज ने ओम साईं बेवरेजेस के माध्यम से ही झारखंड में शराब की आपूर्ति की थी.
अन्य कंपनियां भी दौड़ में शामिल
इसके अलावा अरविंद सिंह नामक व्यक्ति पर उत्पाद विभाग के कार्यों में अनौपचारिक रूप से हस्तक्षेप कर नीतिगत फैसलों को प्रभावित करता था.नवीन केडिया के बयान से यह भी स्पष्ट हुआ है कि छत्तीसगढ़ की अन्य कंपनियां जैसे वेलकम डिस्टिलरीज और भाटिया वाइन्स मर्चेंट्स भी झारखंड के बाजार में पैर जमाने की दौड़ में शामिल थीं. ACB अब केडिया द्वारा दी गई इस जानकारी के आधार पर डिजिटल साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन की कड़ियों को जोड़ रही है.

