रांची: झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने लातेहार के जिला खनन पदाधिकारी (DMO) को सख्त हिदायत देते हुए प्रार्थी के बकाया 28 लाख रुपये का तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया. दरअसल, लातेहार उपायुक्त द्वारा नीलामी में बेचे गए वाहन की वापसी के बाद वाहन के मालिक को भुगतान नहीं किया गया, जिसको लेकर प्रार्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
अदालत में भुगतान में गड़बड़ी पर नाराजगी
अदालत में प्रार्थी ने बताया कि नीलामी में खरीदी गई गाड़ी की वापसी मद की राशि का ब्याज चेक के माध्यम से भुगतान कर दिया गया, लेकिन मूल राशि NEFT के माध्यम से कंपनी के नाम पर भेजी जानी थी. गलती से कंपनी के बजाय प्रोपराइटर का नाम डाल दिया गया, जिसके कारण भुगतान नहीं हो सका. अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है ताकि प्रार्थी को भुगतान न मिले.
अभिलंब राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश
अदालत ने जिला खनन पदाधिकारी (DMO), लातेहार को आदेश दिया कि वह अभिलंब राशि का भुगतान सुनिश्चित करें, अन्यथा आगामी 6 अप्रैल को अदालत में सशरीर उपस्थित रहें.
अवैध वाहन की नीलामी और रजिस्ट्रेशन में समस्या
जानकारी के अनुसार, अवैध रूप से सामान ढुलाई के एक वाहन को लातेहार खनन विभाग ने पकड़ा था. लातेहार उपायुक्त ने समुचित कार्रवाई के बाद इस वाहन की नीलामी कर दी थी. नीलामी में प्रार्थी ने वाहन खरीदा, लेकिन जब उसने उसका रजिस्ट्रेशन अपने नाम कराने की कोशिश की, तो DTO ऑफिस में बताया गया कि यह वाहन लोन पर है और लोन देने वाली कंपनी की ओर से NOC नहीं मिला है. इस कारण उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका, जिस पर प्रार्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की.
हाईकोर्ट का निर्देश: राशि वापस करें और वाहन पुनः लें
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि प्रार्थी को परेशानी हो रही है, तो नीलामी में ली गई राशि उसे वापस कर दें और वाहन को उससे वापस ले लें.
