Giridih : जिला के बिरनी प्रखंड के खाखीपीपर स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय के बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है. वर्ष 2009-10 में विद्यालय भवन निर्माण के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत ₹ 4,75,000 की राशि कथित रूप से खर्च दिखा दी गई, लेकिन आज तक विद्यालय भवन धरातल पर नहीं बन सका. अब इस पूरे मामले में सरकारी राशि की बंदरबांट का आरोप लगाते हुए स्थानीय गांव निवासी राजू अंसारी ने उपायुक्त, गिरिडीह को लिखित शिकायत देकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भवन निर्माण के लिए स्वीकृत राशि का दुरुपयोग किया गया और सरकारी धन का हिसाब आज तक स्पष्ट नहीं हो सका। आवेदनकर्ता ने तत्कालीन विद्यालय प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
दो महीने बीत जाने के बाद भी न जांच शुरू हुई और न ही कोई कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलने पर CPIML नेता राजेश सिन्हा ने भी इसे गंभीर बताते हुए शिक्षा विभाग के ADPO प्रकाश सिन्हा से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की. राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने स्वयं जांच करने और पत्र जारी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी न जांच शुरू हुई और न ही कोई कार्रवाई हुई. राजेश सिन्हा ने कहा कि यदि विभाग अब भी मामले को दबाने की कोशिश करेगा तो वे सीधे उपायुक्त से मिलकर कार्रवाई की मांग करेंगे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग के कुछ भ्रष्ट कर्मियों ने विभिन्न कार्यों के नाम पर नकद और ऑनलाइन रिश्वत तक ली है, ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा. शिकायत केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है. आवेदन में विद्यालय में मध्याह्न भोजन (MDM), साइकिल वितरण, छात्रवृत्ति योजना सहित कई सरकारी योजनाओं में अनियमितता का आरोप लगाया गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि विद्यालय के दो शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं आते, लेकिन उपस्थिति पंजी में कथित रूप से फर्जी हाजिरी दर्ज कर दी जाती है. जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. आवेदनकर्ता ने उपायुक्त से ग्राम शिक्षा समिति के बैंक खाते की जांच, विद्यालय में संचालित सभी सरकारी योजनाओं का सामाजिक एवं वित्तीय ऑडिट, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा विद्यालय में नियमित शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की है. अब सवाल यह है कि सरकारी खजाने से निकली लाखों रुपये की राशि आखिर गई कहां? यदि भवन निर्माण के लिए पैसा जारी हुआ था तो विद्यालय भवन आज तक क्यों नहीं बना? ग्रामीणों की नजर अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है.

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