हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग की विश्वप्रसिद्ध और ऐतिहासिक रामनवमी का आगाज इस बार भी बेहद भव्य तरीके से हुआ, लेकिन इस रविवार को हजारीबाग की सड़कों पर केवल भक्ति और उत्साह का ही नजारा नहीं दिखा, बल्कि वहां मौजूद रामभक्तों ने मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है.रविवार को जब हजारीबाग की सड़कें लाखों की भीड़ और दर्जनों पारंपरिक अखाड़ों की शोभायात्रा से पटी हुई थीं, तभी एक गंभीर मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस मुख्य मार्ग पर आ गई. हजारों की तादाद में नाचते-गाते युवाओं और विशाल झंडों के बीच से एम्बुलेंस का निकलना असंभव सा लग रहा था. हर तरफ जय श्री राम के नारों की गूंज थी और पैर रखने तक की जगह नहीं थी.

तत्परता और अनुशासन का परिचय:

जैसे ही शोभायात्रा में शामिल रामभक्तों और अखाड़े के वॉलिंटियर्स की नजर एम्बुलेंस पर पड़ी, उन्होंने तुरंत अपना उत्सव रोक दिया. बिना किसी देरी के, युवाओं ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर मानव श्रृंखला बनाई और देखते ही देखते भीड़ के बीचों-बीच एम्बुलेंस के लिए एक खाली गलियारा तैयार कर दिया. शोभायात्रा में शामिल लोगों ने कहा कि हमारे लिए उत्सव जरूरी है, लेकिन किसी की जान बचाना उससे भी बड़ा धर्म है. जैसे ही हमने सायरन सुना, सभी ने एक स्वर में एम्बुलेंस को पहले निकलने देने का फैसला किया.

