साइबर क्राइम को लेकर HC सख्त, कहा- एक माह के अंदर उठाए जरूरी कदम नहीं तो होगी कार्रवाई

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने बढ़ते साइबर फ्रॉड पर सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकार को एक महीने का अल्टीमेट दिया है और कहा...

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने बढ़ते साइबर फ्रॉड पर सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकार को एक महीने का अल्टीमेट दिया है और कहा है कि साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतों पर सरकार गंभीर होकर कार्रवाई करे, अन्यथा अदालत कड़ा रुख अख्तियार करेगी.

जनहित याचिका पर सुनवाई

दरअसल, याचिकाकर्ता मनोज कुमार सिंह ने अदालत में जनहित याचिका दाखिल कर यह कहा है कि झारखंड में आईटी एक्ट की धारा 46 के तहत शिकायतों के निपटारे की कानून व्यवस्था लागू होने के बावजूद यह प्रभावी नहीं है. शिकायत तो दर्ज हो जाती है, लेकिन उसका निपटारा नहीं किया जाता. मामले में अदालत ने सुनवाई करते हुए सरकार को सख्त हिदायत दी है और कहा है कि साइबर फ्रॉड से जुड़ी बढ़ती शिकायतों पर सरकार को गंभीर होना चाहिए.

अधिनिर्णायक अधिकारी नियुक्त, फिर भी ढिलाई

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि झारखंड सरकार द्वारा 2 सितंबर 2025 को मामलों के निपटारे के लिए सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग के सचिव को आधिकारिक रूप से अधिनिर्णायक अधिकारी नियुक्त किया गया है. पूजा सिंघल अधिनिर्णायक अधिकारी के रूप में नियुक्त हैं, लेकिन मामले लंबित हैं. शिकायतें दर्ज होती हैं, पर कार्रवाई नहीं होती. अधिनिर्णायक अधिकारी का कार्य दोनों पक्षों के विवादों को सुलझाना, साक्ष्यों की वैधता तय करना और संबंधित धाराओं के तहत जुर्माना या दंड लगाना होता है.

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15 दिनों में व्यापक प्रचार-प्रसार का निर्देश

अदालत ने कहा कि 15 दिनों के अंदर सरकार साइबर फ्रॉड से बचने के उपायों एवं पीड़ितों के लिए शिकायत सेल से जुड़ी टोल फ्री नंबर, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और सुनवाई से संबंधित जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार करे. ताकि आम लोग आईटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया से अवगत हो सकें. यह प्रचार-प्रसार क्षेत्रीय भाषा, समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों से किया जाए.

6 महीने में SOP तैयार करने का निर्देश

अदालत ने सुझाव दिया है कि वर्कशॉप और जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को साइबर फ्रॉड से बचने और कानूनी उपायों की जानकारी दी जाए. साथ ही 6 महीने के अंदर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर उसे सार्वजनिक किया जाए, ताकि एक्ट के नियमों का सही अनुपालन हो सके.

30 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश

अदालत ने निर्देश दिया है कि अधिनिर्णायक अधिकारी 6 माह के भीतर अदालत द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट अदालत में दाखिल करेंगे. इसके लिए 30 अक्टूबर 2026 की तिथि निर्धारित की गई है. रिपोर्ट में शिकायतों के निवारण और आदेशों के अनुपालन की पूरी जानकारी देनी होगी.

ऑनलाइन और आसान शिकायत व्यवस्था पर जोर

अदालत में राज्य सरकार ने बताया कि शिकायत ईमेल या डाक के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है. इस पर अदालत ने कहा कि प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने की जरूरत है. फ्रॉड होने के तुरंत बाद शिकायत दर्ज होने से उसके निवारण में आसानी होगी. इसके लिए टोल फ्री नंबर, 24×7 हेल्पलाइन और आसान ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि पीड़ितों को त्वरित सहायता मिल सके.

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