रांची: पैनम कोल माइंस द्वारा अवैध खनन किए जाने की सीबीआई जांच और विस्थापितों के पुनर्वास की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूर्व आदेश के आलोक में पैनम कंपनी की ओर से जवाब दाखिल किया गया है. कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि उसके हिस्से का कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड के हिस्से का काम लंबित है. इस पर संबंधित कंपनी की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया.

मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को
अदालत ने समय देते हुए अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस मामले में कोर्ट के निर्देश पर झालसा (झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण) ने स्थल निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंप दी है. जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा जिन कार्यों के पूरे होने का दावा किया गया था, उनमें से लगभग 80 प्रतिशत कार्य अभी तक नहीं किए गए हैं. मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को निर्धारित की गई.
सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुक्सान
झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच में इस जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. दरअसल, पैनम माइंस नाम की कंपनी को वर्ष 2015 में सरकार ने पाकुड़ और दुमका जिले में कोयला खनन का लीज दिया था, लेकिन उसपर यह आरोप है कि उसने लीज से ज्यादा खनन किया जिससे सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुक्सान हुआ है. इस संबंध में हाईकोर्ट के अधिवक्ता राम सुभग सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है.
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