गिरिडीह: केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के आवाहन पर अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ के बैनर तले मंगलवार को काला दिवस मनाया गया. इस दौरान कर्मचारियों ने भोजनावकाश के समय एलआईसी कार्यालय के समक्ष द्वार प्रदर्शन कर केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चारों श्रम संहिताओं के खिलाफ जोरदार विरोध जताया.
प्रदर्शन का स्वरूप
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने हाथों में काले बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की. संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि ये नई श्रम संहिताएं मजदूरों और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हैं और इससे उनके अधिकार कमजोर होंगे.
संघ की प्रतिक्रिया
संघ के सचिव धर्म प्रकाश ने कहा कि पहले देश में 44 श्रम कानून लागू थे, जिनके जरिए मजदूरों और कर्मचारियों के वेतन, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाती थीं. लेकिन केंद्र की एनडीए सरकार ने वर्ष 2019-20 के दौरान इन कानूनों में बड़े बदलाव करते हुए 15 कानूनों को समाप्त कर दिया और 29 श्रम कानूनों को मिलाकर चार श्रम कोड बना दिए.
सरकार की अधिसूचना और लागू तिथि
उन्होंने बताया कि तमाम श्रमिक संगठनों के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को अधिसूचना जारी की और निर्णय लिया कि 1 अप्रैल 2026 से इन श्रम संहिताओं को लागू कर दिया जाएगा. इसे संघ ने “प्रतिगामी” और “मजदूर विरोधी” बताते हुए कहा कि इससे श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.
देशव्यापी विरोध और हड़ताल
संघ के नेताओं ने बताया कि इन श्रम संहिताओं के विरोध में देशभर के ट्रेड यूनियनों द्वारा 12 फरवरी 2026 को एकदिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आयोजन किया गया था, जिसमें करीब 30 करोड़ मजदूरों और कर्मचारियों ने भाग लिया. इसके बावजूद सरकार अपने निर्णय पर कायम है.
मांगें और सुझाव
कर्मचारियों ने द्वार प्रदर्शन के माध्यम से केंद्र सरकार से मांग की कि चारों श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए और पूर्व के 44 श्रम कानूनों को फिर से लागू किया जाए, ताकि मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारी
इस विरोध प्रदर्शन में संजय शर्मा, विजय कुमार, उमानाथ झा, अनुराग मुर्मू, कुमकुम बाला वर्मा, सबा परवीन, देवनाथ दास, प्रभास कुमार शर्मा, सुनील कुमार वर्मा, अभय कुमार, महफूज अली, संजय कुमार शर्मा, पंकज कुमार, प्रदीप प्रसाद, माहेश्वरी वर्मा, विजय मंडल, संजय कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए.
