News Desk: महंगी एंटी-एजिंग क्रीम और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स भले ही उम्र के असर को कम करने का दावा करते हों, लेकिन अगर आपकी सोने की पोजीशन गलत है, तो इनका असर कम पड़ सकता है.


दरअसल, रोजाना एक ही गलत तरीके से सोना चेहरे पर दबाव डालता है, जिससे धीरे-धीरे फाइन लाइन्स और झुर्रियां उभरने लगती हैं. यानी आपकी सुकून भरी नींद ही आपकी स्किन के लिए नुकसानदायक बन सकती है.
एक रिसर्च, जो Aesthetic Surgery Journal में छपी है, उसके मुताबिक सोने का तरीका सिर्फ शरीर ही नहीं, चेहरे पर भी असर डालता है. अगर आप गलत पोजीशन में सोते हैं, तो इससे समय से पहले झुर्रियां आ सकती हैं. आइए जानते हैं कौन-सी पोजीशन आपकी स्किन के लिए नुकसानदायक हो सकती है.
सोने की पोजीशन और स्किन पर असर
जब हम साइड या पेट के बल सोते हैं, तो चेहरा लंबे समय तक तकिये से दबा रहता है. इससे त्वचा पर लगातार दबाव पड़ता है. इस दौरान चेहरे पर तीन तरह का असर होता है—पहला, दबाव (जिससे स्किन दबती है), दूसरा खिंचाव (त्वचा खिंचती है) और तीसरा रगड़ (त्वचा तकिये से रगड़ खाती है). यही वजह है कि समय के साथ चेहरे पर लाइन्स और झुर्रियां दिखने लगती है.
जब आप लंबे समय तक एक ही करवट सोते हैं, तो चेहरे की त्वचा और मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे उनका शेप थोड़ा बदलने लगता है. कम उम्र में स्किन की लचीलापन इसे फिर से सामान्य बना देता है, लेकिन 30 की उम्र के बाद जैसे-जैसे कोलेजन कम होता है, ये निशान धीरे-धीरे स्थायी लाइन्स और झुर्रियों में बदल सकते हैं.
अलग-अलग स्लीपिंग पोजीशन और असर
- पेट के बल सोना – यह पोजीशन स्किन के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक मानी जाती है. इसमें चेहरा सीधे तकिये पर दबा रहता है, जिससे पूरी त्वचा पर दबाव पड़ता है. इससे झुर्रियां जल्दी आ सकती हैं और आंखों के नीचे सूजन भी हो सकती है.
- करवट लेकर सोना – ज्यादातर लोग इसी तरह सोते हैं. इस पोजीशन में गाल और ठुड्डी पर ज्यादा दबाव पड़ता है. अगर आप हमेशा एक ही साइड सोते हैं, तो उस हिस्से पर लाइन्स और झुर्रियां ज्यादा नजर आने लगती हैं.
- पीठ के बल सोना – यह पोजीशन स्किन के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है.इसमें चेहरा तकिये से नहीं दबता, जिससे झुर्रियों का खतरा कम हो जाता है.
स्लीप रिंकल्स और सामान्य लाइन्स में फर्क
अक्सर लोग स्लीप रिंकल्स को उम्र के साथ आने वाली सामान्य लाइन्स या हंसने-मुस्कुराने से बनने वाली रेखाओं जैसा ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग होते हैं.

- एक्सप्रेशन लाइन्स – ये चेहरे के हाव-भाव जैसे मुस्कुराने या भौं सिकोड़ने से बनती हैं, जब मांसपेशियां बार-बार सिकुड़ती हैं.
- स्लीप रिंकल्स – ये सोते समय चेहरे पर पड़ने वाले दबाव और खिंचाव की वजह से बनती हैं, जो धीरे-धीरे स्थायी हो सकती हैं.
