रांची: 24 फरवरी को झारखंड सरकार द्वारा पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट ने राज्य के खेल जगत में एक नई बहस छेड़ दी है. मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत ₹1.58 लाख करोड़ के इस भारी-भरकम बजट में जहां सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण विकास पर जोर दिया गया है. वहीं, खेल क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधानों को लेकर खेल प्रशासकों और विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है.

विभागीय पुनर्गठन: शिक्षा से अलग हुआ खेल
खेल विशेषज्ञ का कहना है कि इस वर्ष के बजट की सबसे बड़ी विशेषता खेल विभाग की नई संरचना है. अब तक खेल को ‘शिक्षा, खेल एवं कला’ के एक व्यापक और जटिल समूह में रखा जाता था, जहां खेल के लिए आवंटित वास्तविक राशि का सटीक आकलन करना कठिन होता था. खेल को अब पर्यटन, कला संस्कृति एवं खेलकूद विभाग के साथ जोड़ा गया है. इस संयुक्त विभाग के लिए सरकार ने 361.67 करोड़ का प्रावधान किया है. इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन और बुनियादी खेल अधोसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास के लिए किया जाएगा.
बजट का गणित: उम्मीदें ज्यादा, आवंटन कम?
राज्य का कुल बजट पिछले वर्ष (2025-26) के 1.45 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1.58 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. यानी बजट में लगभग 13,000 करोड़ की वृद्धि हुई है. हालांकि, खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस वृद्धि का आनुपातिक लाभ खेल क्षेत्र को मिलता नहीं दिख रहा है. जब राज्य का कुल बजट बढ़ता है, तो खेल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए, ताकि हम वैश्विक स्तर की सुविधाएं दे सकें. वर्तमान आवंटन सीमित प्रतीत होता है. खेल विशेषज्ञ ने कहा कि खेल जगत को उम्मीद थी कि इस बार किसी मेगा स्पोर्ट्स सिटी, नई उच्च स्तरीय प्रशिक्षण अकादमी या बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम की घोषणा होगी, लेकिन बजट भाषण में ऐसी किसी बड़ी परियोजना का स्पष्ट उल्लेख न होना खिलाड़ियों को थोड़ा निराश कर सकता है.
झारखंड की प्रतिभा बनाम अधोसंरचना की चुनौती
झारखंड को भारतीय खेलों की ‘नर्सरी’ माना जाता है. यहां के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से हॉकी, तीरंदाजी, एथलेटिक्स और कुश्ती जैसे खेलों में लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सितारे निकलते रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रतिभाओं को तराशने के लिए केवल बड़े शहरों में नहीं, बल्कि प्रखंड स्तर पर खेल सुविधाओं की आवश्यकता है. आधुनिक कोचिंग और खेल विज्ञान केंद्रों के लिए अलग से बजट की दरकार है.
भविष्य की राह
वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट यह संकेत देता है कि सरकार फिलहाल कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है. हालांकि खेल विभाग को एक स्पष्ट पहचान मिलना सकारात्मक कदम है, लेकिन राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर झारखंड का झंडा बुलंद करने के लिए आने वाले समय में वित्तीय निवेश को और अधिक प्रभावी ढंग से बढ़ाने की आवश्यकता होगी.
यह भी पढ़ें: कैबिनेट का फैसलाः नर्सिंग छात्रों को राहत, नेतरहाट में बदलाव, 22 प्रस्तावों को मिली मंजूरी

