रांची: झारखंड राज्य महिला आयोग बीते 06 जून 2020 से अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त होने के कारण प्रभावी रूप से निष्क्रिय है. आयोग के खाली रहने की अवधि में 07 जून 2020 से 31 जनवरी 2026 तक कुल 4014 परिवाद आयोग कार्यालय में प्राप्त हुए, जिनका संस्थागत स्तर पर निस्तारण नहीं हो सका.राज्य में घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे मामलों पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई जारी रहने की बात कही जा रही है, परंतु आयोग के अभाव में पीड़ित महिलाओं को समर्पित मंच, निगरानी और त्वरित सुनवाई की व्यवस्था प्रभावित हुई है। आयोग के पुनर्गठन का प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन है, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है.

क्या है लंबित मामलों की स्थिति:
– 06 जून 2020 से आयोग में अध्यक्ष व सदस्य पद रिक्त
– 07 जून 2020 से 31 जनवरी 2026 के बीच 4014 शिकायतें प्राप्त.
– घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन शोषण, मानव तस्करी के मामले आते है आयोग में.
– विभागीय कार्रवाई जारी, पर आयोग स्तर की सुनवाई ठप.
– आयोग निष्क्रिय होने से ये कार्य नहीं हो रहे है:
– त्वरित सुनवाई का अभाव: आयोग के समक्ष प्रत्यक्ष पेशी, परामर्श और समन की प्रक्रिया ठप रहने से मामलों के समाधान में देरी बढ़ी है.
– निगरानी व अनुशंसा कमजोर : नीतिगत सुझाव, विभागों को अनुशंसा और अनुपालन समीक्षा की व्यवस्था प्रभावित हुई है.
– पीड़ितों के लिए समर्पित मंच नहीं : शिकायत दर्ज करने, मध्यस्थता और मनो–सामाजिक सहयोग की एकीकृत सुविधा बाधित है.
– जागरूकता अभियानों पर असर : महिला अधिकार, कानूनी सहायता और हेल्पलाइन समन्वय जैसे अभियानों की रफ्तार घटी है.

