रांची: वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण विकास के लिए 12 हजार 346 करोड़ 90 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित है. केंद्र तथा पंचायत ज्ञान केंद्र आदि के लिए कुल 209 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान का प्रस्ताव है. 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुदान मद में 1 हजार 340 करोड़ रुपये प्राप्त होने की संभावना है. उक्त राशि में से 30 प्रतिशत जलापूर्ति पर, 30 प्रतिशत स्वच्छता पर तथा शेष 40 प्रतिशत स्थानीय आवश्यकताओं की योजनाओं पर व्यय किया जा सकेगा. पंचम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार द्वारा अनुदान मद में 216 करोड़ रुपये प्राप्त करने का प्रस्ताव है. प्रति महिला प्रति माह 2 हजार 500 रुपये की दर से भुगतान सुनिश्चित करने हेतु 14 हजार 65 करोड़ 57 लाख रुपये का बजटीय प्रावधान प्रस्तावित है.

मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन योजना के अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को आच्छादित किया गया है. निःशक्त व्यक्तियों, आदिम जनजाति समुदाय, निराश्रित महिलाओं, HIV/AIDS से ग्रसित व्यक्तियों, ट्रांसजेंडर/तृतीय लिंग व्यक्तियों तथा 50 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं और अनुसूचित जनजाति/अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को भी पेंशन का लाभ दिया जा रहा है. इस योजना के लिए 3 हजार 517 करोड़ 23 लाख रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है, जिससे लगभग 34 लाख लाभार्थी आच्छादित होंगे. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के लिए 1 हजार 463 करोड़ 58 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे लगभग 12 लाख लोगों को पेंशन दी जा सकेगी. असहाय एवं वंचित वर्ग को ठंड से बचाने के लिए 9 लाख से अधिक कंबल वितरण हेतु 56 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है. राज्य संसाधन से 1,100 आंगनबाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण के लिए 176 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है.
कुपोषण से निपटने के लिए 829 करोड़ 99 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है. 2 लाख 60 हजार से अधिक गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा 6 वर्ष तक के 21 लाख 34 हजार से अधिक बच्चों को वर्ष में 300 दिनों तक उच्च गुणवत्ता एवं ऊर्जा युक्त पूरक पोषाहार उपलब्ध कराने की योजना है. 3 से 6 वर्ष के 10 लाख 76 हजार से अधिक बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, पठन-पाठन सामग्री तथा बैठने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी. इस मद में 260 करोड़ 17 लाख रुपये का व्यय प्रस्तावित है. केंद्र प्रायोजित आंगनबाड़ी सेवाओं हेतु 418 करोड़ 84 लाख रुपये तथा राज्य योजना के अंतर्गत 619 करोड़ 83 लाख रुपये का प्रावधान है. 14 से 18 वर्ष की 1 लाख 41 हजार किशोरियों को पूरक पोषाहार उपलब्ध कराने के लिए 41 करोड़ 26 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है. आदिम जनजाति बहुल क्षेत्रों में 495 आंगनबाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण के लिए 55 करोड़ 32 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं. महिलाओं, बच्चों और सामाजिक सुरक्षा के लिए कुल 22 हजार 995 करोड़ 69 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित है.
शिक्षा क्षेत्र में 80 उत्कृष्ट विद्यालयों के संचालन और विस्तार के लिए 182 करोड़ 60 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है. 325 प्रखंड स्तरीय लीडर स्कूलों में से 222 विद्यालयों का आधारभूत संरचना कार्य पूर्ण हो चुका है. राज्य के 34,847 प्रारंभिक विद्यालयों, 1,711 माध्यमिक विद्यालयों और 1,157 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 70 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. 203 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 57 झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय और 26 नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय संचालित हैं. 803 विद्यालयों में 1,197 व्यावसायिक लैब स्थापित की गई हैं तथा 888 लैब स्थापना की प्रक्रिया में हैं. लगभग 1 लाख 58 हजार विद्यार्थी व्यावसायिक शिक्षा से लाभान्वित हो रहे हैं. 2,495 माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में ICT कार्यक्रम लागू है तथा 2,610 मध्य विद्यालयों को इससे जोड़ा गया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 1 और 2 की नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की गई हैं, जिन्हें सत्र 2026-27 से वितरित किया जाएगा. प्रत्येक शिक्षक को प्रति वर्ष 50 घंटे का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अब तक लगभग 40 हजार शिक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है.
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चतरा में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी. प्रथम चरण में 7 जिलों में 12 नए महाविद्यालय खोले जाएंगे. STEM शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी. प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा के लिए 16 हजार 251 करोड़ 43 लाख रुपये तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए 2 हजार 564 करोड़ 45 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित है.
स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर की रोकथाम के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. राज्य के सभी 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों में PET-CT स्कैन मशीन स्थापित की जाएगी. 24 जिला सदर अस्पतालों में मैमोग्राफी मशीन लगाई जाएगी. सभी मेडिकल कॉलेजों में कैथलैब की स्थापना की जाएगी. प्रथम चरण में धनबाद, गिरिडीह, जामताड़ा और खूँटी के सदर अस्पतालों को PPP मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा. दूसरे चरण में लातेहार, साहेबगंज और सरायकेला-खरसावां के अस्पतालों को भी PPP मोड में विकसित करने की योजना है.
यह बजट ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक हस्तक्षेप का संकेत देता है, जिसका उद्देश्य राज्य के समग्र और समावेशी विकास को सुनिश्चित करना है.

