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रांची में सरहुल की धूम, बारिश पर भारी पड़ा सांस्कृतिक जुनून, उमड़ा जनसैलाब, देखें तस्वीरें

रांची: झारखंड की राजधानी रांची आज पूरी तरह से प्रकृति के रंग में रंगी नजर आई. आदिवासी समाज के सबसे बड़े और...

रांची: झारखंड की राजधानी रांची आज पूरी तरह से प्रकृति के रंग में रंगी नजर आई. आदिवासी समाज के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्व सरहुल के अवसर पर शहर में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला. मूसलाधार बारिश और बदलते मौसम के बावजूद हजारों की संख्या में सरना धर्मावलंबियों ने पारंपरिक शोभायात्रा निकाली, जिसने पूरे शहर को उत्सव के माहौल में सराबोर कर दिया.

बारिश पर भारी पड़ा सांस्कृतिक जुनून

दोपहर के समय जब शोभायात्रा शुरू हुई, तो आसमान से बरसती बूंदों ने स्वागत किया. हालांकि बारिश भी लोगों के कदम नहीं रोक सकी. ढोल, नगाड़ों और मांदर की थाप पर थिरकते युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी धुन में मगन होकर सिरमटोली स्थित मुख्य सरना स्थल की ओर बढ़ते रहे. पारंपरिक सफेद और लाल रंग की साड़ियों और धोती में सजे श्रद्धालु अपनी संस्कृति के प्रति अटूट प्रेम का प्रदर्शन कर रहे थे.

बारिश पर भारी पड़ा सांस्कृतिक जुनून
बारिश पर भारी पड़ा सांस्कृतिक जुनून

शोभायात्रा की खास झलकियां

जुलूस में शामिल लोग पारंपरिक मुंडा, उरांव और हो जनजातीय परिधानों में नजर आए. सिर पर साल के फूल और हाथों में वाद्य यंत्र लिए युवा अपनी जड़ों से जुड़ाव दिखा रहे थे. सड़कों पर जगह-जगह सामूहिक झूमर और पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई दी. यह सिर्फ एक जुलूस नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की एकजुटता का प्रतीक बन गया. शोभायात्रा के मार्ग में विभिन्न संगठनों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे. बारिश के बीच भी लोगों को शर्बत, भीगा हुआ चना और बुंदिया का प्रसाद वितरित किया गया, जो झारखंडी अतिथि सत्कार की मिसाल है.

सुरक्षा पर कड़ी नजर, SSP खुद मौजूद
सुरक्षा पर कड़ी नजर, SSP खुद मौजूद

सरहुल का महत्व

सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि धरती माता और जंगलों के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है. इस दिन मुख्य रूप से साल के वृक्ष की पूजा की जाती है. माना जाता है कि साल के फूल नए जीवन, उर्वरता और समृद्धि का संदेश लेकर आते हैं. जब पेड़ों पर नए पत्ते और फूल आते हैं, तो इसे नए साल की शुरुआत माना जाता है. खेतों में बुआई से पहले प्रकृति से अनुमति और आशीर्वाद लेने की यह प्राचीन परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सरहुल धरती माता और सूर्य देव के विवाह का उत्सव है, जिसके बाद प्रकृति में नव सृजन की प्रक्रिया शुरू होती है.

बारिश में भी कम नहीं हुआ उत्साह
बारिश में भी कम नहीं हुआ उत्साह

सांस्कृतिक धरोहर का संगम

शहर के विभिन्न अखाड़ों से निकली छोटी-बड़ी शोभायात्राएं अंत में सिरमटोली के मुख्य सरना स्थल पर एकत्रित हुईं. यहां पाहन द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की गई और आने वाले वर्ष में अच्छी बारिश व फसल की कामना की गई. रांची की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब बताता है कि आधुनिकता के दौर में भी झारखंड अपनी परंपराओं और प्रकृति प्रेम को सहेजने में गर्व महसूस करता है.

स्वागत के लिए बनाया गया मंच टूटा
स्वागत के लिए बनाया गया मंच टूटा

स्वागत के लिए बनाया गया मंच टूटा, कई लोगों को लगी चोट

सरहुल शोभायात्रा के लिए बनाया गया मंच अचानक से टूट गया. यह घटना अल्बर्ट एक्का चौक के पास हुई है. इस घटना में मंच पर मौजूद और नीचे खड़े कई लोगों को चोट लगी. हालांकि कोई बड़ी घटना नहीं हुई न ज्यादा कोई नुकसान हुआ.

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