रांची/नई दिल्ली: पलामू जिले के लेस्लीगंज प्रखंड के लोटवा गांव में गरीबी और इलाज के अभाव में एक मां द्वारा अपने नवजात शिशु को 50 हजार रुपये में बेचने के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है. आयोग ने पलामू के उपायुक्त के खिलाफ सशर्त समन जारी करते हुए उन्हें 27 मार्च को नई दिल्ली स्थित आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है. यह कार्रवाई चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन के बैद्यनाथ कुमार की शिकायत के आधार पर की गई. शिकायत में कहा गया है कि पिंकी देवी नामक महिला ने आर्थिक तंगी और बीमारी के कारण यह कदम उठाया.

सरकारी योजनाओं से वंचित रहने का आरोप
शिकायत के अनुसार परिवार के पास आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं थे, जिसके कारण वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे थे. परिवार मंदिर के शेड में रहने को मजबूर था. आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने केवल 20 किलो चावल देकर औपचारिकता निभाई, लेकिन स्थायी राहत की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए. मामले को मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए आयोग ने 11 सितंबर 2025 को स्वतः संज्ञान लिया था.
रिपोर्ट नहीं सौंपने पर कड़ा रुख
जिला प्रशासन की ओर से पहले दी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि परिवार को आंगनवाड़ी, राशन और शिक्षा सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है तथा जमीन आवंटन की प्रक्रिया जारी है. हालांकि आयोग ने जमीन आवंटन की अद्यतन रिपोर्ट मांगी थी, जो निर्धारित समय सीमा के बावजूद प्रस्तुत नहीं की गई. छह जनवरी को दिए गए निर्देशों की अनदेखी पर आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए उपायुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा है और इसमें जवाबदेही तय की जाएगी.

