Ranchi: झारखंड के विभिन्न जिलों में कोयला खदानों के संचालन को लेकर आए ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं. खान विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के कुल 214 कोयला लीजधारकों में से एक बड़ा हिस्सा वर्तमान में निष्क्रिय है. जहां 51 लीजधारकों की लीज लैप्स हो चुकी है, वहीं 69 खदानें अस्थायी रूप से बंद पड़ी हैं. गिरिडीह में 2 में से 1 कार्यरत है, देवघर की एकमात्र खदान चालू है, जबकि जमशेदपुर में एकमात्र लीजधारक की लीज लैप्स हो चुकी है.
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कहीं उत्पादन की चमक, कहीं सन्नाटा
राज्य के कोयला बेल्ट में खदानों की स्थिति जिलावार काफी भिन्न है. बोकारो और धनबाद जैसे प्रमुख केंद्रों में भी बड़ी संख्या में लीज लैप्स और बंदी के मामले सामने आए हैं. बड़ी संख्या में लीज लैप्स होने और खदानों के बंद होने से न केवल राज्य के राजस्व पर असर पड़ने की संभावना है, बल्कि स्थानीय रोजगार और कोयले की आपूर्ति श्रृंखला पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं. जानकारों का मानना है कि नई नीलामी प्रक्रियाओं और पर्यावरण क्लीयरेंस में देरी इन बंद पड़ी खदानों के पीछे का मुख्य कारण हो सकती है.
बोकारो और धनबाद : खनन के गढ़ में संकट
• बोकारो: यहां कुल 26 लीजधारक हैं, लेकिन जमीन पर केवल 9 कार्यरत हैं. 4 खदानें स्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं, जबकि 13 लीजधारकों की लीज लैप्स हो गई है.
• धनबाद: 105 लीजधारकों के साथ सबसे बड़ा केंद्र होने के बावजूद यहां केवल 47 खदानें चल रही हैं. चिंता की बात यह है कि 53 खदानें अस्थायी रूप से बंद हैं और 5 की लीज लैप्स हो चुकी है.

संथाल परगना: लीज लैप्स की मार
• गोड्डा: यहां 11 लीजधारकों में से केवल 1 कार्यरत है, जबकि 9 की लीज लैप्स हो चुकी है.
• जामताड़ा: यहां स्थिति सबसे गंभीर है, जहां सभी 5 लीजधारकों की लीज लैप्स हो चुकी है.
• दुमका: 3 में से 2 लीज लैप्स और 1 अस्थायी बंद.
• पाकुड़: यहां स्थिति बेहतर है, 3 में से 2 खदानें कार्यरत हैं.
हजारीबाग और रामगढ़: मिला-जुला असर
• हजारीबाग: 18 लीजधारकों में से 12 सक्रिय हैं, जबकि 5 की लीज खत्म हो चुकी है.
• रामगढ़: 25 लीजधारकों में से 12 कार्यरत हैं, जबकि 7 अस्थायी बंद और 6 की लीज लैप्स है.
