न्यूज वेब खास: झारखंड में बैंकों जमा हैं 3,79,735 करोड़ रुपए, राज्य में काम कर रहे 3,449 शाखाएं और 3,338 एटीएम

रांचीः झारखंड में बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्टर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। राज्य में वर्तमान में बैंकों की 3,449 शाखाएं हैं और 3,338 एटीएम...

रांचीः झारखंड में बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्टर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। राज्य में वर्तमान में बैंकों की 3,449 शाखाएं हैं और 3,338 एटीएम काम कर रहे हैं। दिसंबर 2020 से अब तक 198 शाखाएं जोड़ी गईं हैं। मार्च 2014 से बैंकों में जमा राशि 220 प्रतिशत बढ़कर 3,79,735 करोड़ रुपये हो गया, जबकि अग्रिम 124 प्रतिशत बढ़कर 1,58,714 करोड़ रुपये हो गया है। हर शाखा जमा राशि बढ़कर 110 करोड़ रुपये हो गई है।

पिछले 13 साल में कुल क्रेडिट दस गुना बढ़ा:

कुल क्रेडिट 13 वर्षों में लगभग दस गुना बढ़ गया, जो 2012-13 में 17,349 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,98,201 करोड़ रुपये हो गया। वित्तीय समावेशन कवरेज व्यापक है, जिसमें बचत खाता प्रवेश 99.2 प्रतिशत है। पीएमजेडीवाई खातों में आधार सीडिंग 88.89 प्रतिशत है। जो गोड्डा में 85.24 प्रतिशत से लेकर लोहरदगा में 94.45 प्रतिशत तक है। अन्य जिलों में 1.10 लाख से अधिक सक्रिय बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट काम कर रहे हैं।

महिलाओं की मजबूत भागीदारी:

पीएमजेडीवाई खातों में 56.79 प्रतिशत की मजबूत महिला भागीदारी है, जिसमें 90.14 प्रतिशत खाते ग्रामीण क्षेत्रों मेंहैं।क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात 41.80 प्रतिशत है जो आरबीआई के 60 प्रतिशत के बेंचमार्क से काफी नीचे है। जो बताता है कि राज्य में जुटाए गए जमा का एक बड़ा हिस्सा कहीं और तैनात किया गया है। जिला-स्तरीय भिन्नता काफी है। पूर्वी सिंहभूम में 71.96 प्रतिशत से लेकर जामताड़ा में 29.52 प्रतिशत तक है। निजी क्षेत्र के बैंक 72.92 प्रतिशत के सीडी अनुपात पर काम करते हैं, लघुवित्त बैंक 68.73 प्रतिशत पर, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक औसतन 34.37 प्रतिशत हैं।

झारखंज में निजि का और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की फैक्ट फाइल:

• निजी बैंकों का ग्रामीण सीडी अनुपात 197.19% तक पहुंच गया है

• एमएसएमई ऋण 13 वर्षों में 9 गुना बढ़कर 39,196 करोड़ रुपये हो गया

• कृषि ऋण 10 गुना बढ़कर 23,594 करोड़ रुपये हो गया

• वार्षिक ऋण योजना के मुकाबले कृषि ऋण उपलब्धि लक्ष्य का केवल 22.73% है

• किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के सक्रिय खाते वित्त वर्ष 2022-23 में 6.22 लाख से घटकर 2.49 लाख हो गए

• प्रति खाता औसत वितरण 0.81 लाख रुपये से बढ़कर 1.50 लाख रुपये हो गया

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