NewsWave Exclusive: झारखंड में 51% कर्मचारियों को बिना लिखित अनुबंध वेतन, 70% महिला श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा नहीं

रांची: झारखंड में रोजगार से जुड़े आंकड़ों ने चौंकाने वाली स्थिति सामने रखी है. राज्य में 51.7 प्रतिशत कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें...

रांची: झारखंड में रोजगार से जुड़े आंकड़ों ने चौंकाने वाली स्थिति सामने रखी है. राज्य में 51.7 प्रतिशत कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें बिना किसी लिखित अनुबंध के वेतन मिलता है. हालांकि पहले यह आंकड़ा 64.8 प्रतिशत था, जिससे कुछ कमी जरूर आई है.

इसी तरह बिना छुट्टी के वेतन पाने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी 42.9 प्रतिशत है, जबकि पहले यह आंकड़ा 53.5 प्रतिशत था. इससे स्पष्ट है कि श्रम क्षेत्र में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है.

महिला श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का अभाव

आंकड़ों के अनुसार नियमित वेतन पाने वाली 70.5 प्रतिशत महिला श्रमिकों को किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में कामकाजी महिलाएं पेंशन, बीमा या अन्य सुरक्षा योजनाओं से वंचित हैं.

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शहरी और ग्रामीण आय में बड़ा अंतर

राज्य में शहरी और ग्रामीण आय के बीच भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है. शहरी क्षेत्रों में वेतन पाने वाले पुरुषों की औसत आय 29,159 रुपये प्रतिमाह है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों की औसत आय केवल 15,252 रुपये प्रतिमाह है.

इसके अलावा सभी रोजगार श्रेणियों और क्षेत्रों में पुरुषों की आय महिलाओं की तुलना में अधिक पाई गई है.

श्रम भागीदारी दर में बढ़ोतरी

झारखंड में श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 45.1 प्रतिशत से बढ़कर 63.8 प्रतिशत हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 60.1 प्रतिशत से 3.7 प्रतिशत अधिक है.

वहीं श्रमिक जनसंख्या अनुपात 43.9 प्रतिशत से बढ़कर 66.9 प्रतिशत हो गया है. बेरोजगारी दर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बेरोजगारी 7.5 प्रतिशत से घटकर 1.3 प्रतिशत रह गई है, जो करीब 83 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है.

झारखंड में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति

• ग्रामीण महिला श्रम बल भागीदारी दर अब राष्ट्रीय ग्रामीण महिला औसत से 10.1 प्रतिशत अधिक है.

• पुरुष-महिला श्रम भागीदारी का अंतर 2017-18 में 58.5 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 28.5 प्रतिशत रह गया है.

• संयुक्त स्तर पर महिला बेरोजगारी दर 5.6 प्रतिशत से घटकर 0.5 प्रतिशत हो गई है.

• 70.5 प्रतिशत नियमित वेतन वाली महिला श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिल रहा है.

• शहरी युवाओं में बेरोजगारी अब भी अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई है.

• 51.7 प्रतिशत श्रमिक बिना लिखित अनुबंध के नियमित वेतन प्राप्त कर रहे हैं.

• 42.9 प्रतिशत कर्मचारियों को बिना छुट्टी के वेतन मिलता है.

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