NewsWave Exclusive: हाल-ए-ब्यूरोक्रेसी, सरकार से भी उलझे, आपस में भी ठने झारखंड कैडर के IAS अफसर

रांची: झारखंड कैडर का IAS महकमा भी विवादों से अछूता नहीं रहा है. कभी आपस में उलझे, तो कभी सरकार से भी...

रांची: झारखंड कैडर का IAS महकमा भी विवादों से अछूता नहीं रहा है. कभी आपस में उलझे, तो कभी सरकार से भी ठन गई. वहीं सरकार ने कई मामलों में ब्यूरोक्रेसी पर शिकंजा भी कसा. कई मंत्रियों की शिकायत रही कि सचिव उनकी बातों को नहीं सुनते. कई बार अफसर आपस में भी विवाद में उलझ गए.

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी और हजारीबाग के तत्कालीन डीसी मनीष रंजन के बीच भी विवाद रहा. मामला राजभवन तक पहुंचा. इसके बाद हजारीबाग के तत्कालीन डीसी सुनील कुमार पर NTPC के अधिकारियों की पिटाई का आरोप लगा, जिस पर विभागीय कार्रवाई चल रही है.

अब IAS के खिलाफ मंत्री की मारक टिप्पणी

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सचिव के. श्रीनिवासन के सीआर में जो टिप्पणी की है, उसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है. मंत्री ने श्रीनिवासन को 7.2 अंक दिए हैं, जो IAS अधिकारियों के लिए काफी कम माने जाते हैं. टिप्पणी में Lack of Leadership, Lack of Communication Skill जैसे गंभीर उल्लेख किए गए हैं. साथ ही यह भी लिखा गया कि विभाग के अधिकतर अधिकारी-कर्मचारी नाराज और असंतुष्ट रहे.

IAS ज्योत्सना अपने कैडर में वापस नहीं आईं

राज्य की पहली महिला IAS अफसर ज्योत्सना वर्मा रे बर्खास्त तो हो गईं, लेकिन उन्होंने 2011 से 2019 तक अपनी संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया. 1992 बैच की IAS अधिकारी ज्योत्सना वर्मा रे मनीला में विश्व बैंक में प्रतिनियुक्ति पर थीं. प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के बाद भी वह वहीं बनी रहीं.

IAS अफसरों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां

अरुण कुमार सिंह: पूर्व अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर अरुण कुमार सिंह से देवघर जमीन घोटाला मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया.

बाघमारे कृष्णा प्रसाद: लगभग एक वर्ष तक ड्यूटी से गायब रहने वाले बाघमारे कृष्णा प्रसाद विभागीय कार्रवाई में दोषी पाए गए.

मनोज कुमार: गैर-सेवा कोटे से IAS बने मनोज कुमार भी जांच के दायरे में रहे. उनके सीआर में भी प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की गई.

सरकार और IAS अफसरों के बीच भी ठनी

केस नंबर 1: CMO और एस.के. सत्पथी के बीच टकराव

21 खनिज खदानों के लीज रद्द करने के मामले में तत्कालीन खान सचिव एस.के. सत्पथी अड़े रहे. CMO ने कई बार लीज नवीनीकरण के लिए कमेटी बनाई, लेकिन सभी ने रद्द करने की अनुशंसा की. बाद में खान विभाग पर समीक्षा का दबाव बनाया गया, पर सत्पथी अपने निर्णय पर कायम रहे और 18 खदानों की लीज रद्द करने की अनुशंसा कर दी.

केस नंबर 2: रंधीर सिंह और कुलकर्णी आमने-सामने

पूर्व कृषि मंत्री रंधीर सिंह और तत्कालीन कृषि सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी के बीच भी टकराव हुआ. कृषि योजनाओं को शीघ्र लागू कराने को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़े, जिसके बाद कुलकर्णी का तबादला कर दिया गया.

केस नंबर 3: चंद्रप्रकाश चौधरी और ए.पी. सिंह के बीच विवाद

पूर्व पेयजल मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी और पेयजल सचिव ए.पी. सिंह के बीच भी तनातनी रही. ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को लेकर मंत्री ने कई बार पत्र लिखा, जिसके बाद ए.पी. सिंह का तबादला कर उन्हें स्कूली शिक्षा विभाग का सचिव बना दिया गया.

केस नंबर 4: CMO और रहाटे आमने-सामने

अडाणी पावर से बिजली आपूर्ति के मुद्दे पर तत्कालीन ऊर्जा सचिव एस.के.जी. रहाटे और CMO के बीच विवाद हुआ. इसके बाद रहाटे एक माह की छुट्टी पर चले गए. बाद में उन्हें ऊर्जा विभाग से हटाकर श्रम विभाग भेजा गया और फिर गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई.

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