Ranchi : झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर भी आरोपों से बचे नहीं हैं. हर महीने औसतन दो से चार अफसर निलंबित हो रहे हैं. सरकार की रिर्पोट के अनुसार 2012 से अब तक यानी 14 साल में राज्य प्रशासनिक सेवा के 88 अफसर निलंबित हो चुके हैं. हालांकि समय-समय पर ये अफसर निलंबन मुक्त भी हुए हैं. निलंबित अफसरों के खिलाफ अवैध दाखिल-खारिज, राजस्व की क्षति, वित्तीय अनियमितता, अवैध बालू-कोयला खनन में संलिप्तता और अनधिकृत गैरहाजिरी जैसे संगीन आरोप लगे हैं.
सबसे अधिक CO-BDO पर गिरी है गाज
सबसे अधिक प्रखंड विकास पदाधिकारी BDO और अंचलाधिकारियों CO पर भी गाज गिरी है. पिछले 14 साल में कुल 52 सीओ CO और बीडीओ निलंबित हुए हैं. वहीं एसडीओSDO, उपसचिव और उप समाहर्ता स्तर के 26 अफसर निलंबित किए जा चुके हैं. 10 अधिकारी ऐसे है, जिनके खिलाफ गंभीर आरोपों के कारण सेवा से बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का फैसला लिया गया, लेकिन इनमें से कुछ अफसरों को बाद में कोर्ट के आदेश या विभागीय समीक्षा के बाद शर्तों के साथ निलंबन में तब्दील किया गया. वहीं निलंबन मुक्त होकर विभागीय कार्यवाही का सामना करने वाले अफसरों की संख्या 45 है.
किन संगीन आरोपों के तहत हुई कार्रवाई
• भू-राजस्व घोटाला एवं अवैध दाखिल-खारिज : गैर-मजरुआ भूमि, वन भूमि, और खास महाल जमीनों की गलत तरीके से बंदोबस्ती और म्यूटेशन करना. अधिकारियों ने बिना अभिलेखों की जांच किए और वरीय अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन करते हुए माफिया व विशेष व्यक्तियों के हक में दाखिल-खारिज का आदेश जारी किया. इससे राज्य सरकार को अरबों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंची.
• वित्तीय अनियमितता एवं विकास योजनाओं में गबन : 14वें और 15वें वित्त आयोग की राशि, मनरेगा योजना, और आपदा प्रबंधन कोष के आबंटन में व्यापक हेराफेरी करना. टेंडर प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाना और फर्जी बिलों के आधार पर राशि की अवैध निकासी करना जैसे आरोप लगे.
• अनधिकृत अनुपस्थिति एवं अनुशासनहीनता : नई पोस्टिंग के बावजूद संबंधित जिले व अंचल में योगदान न देना और बिना किसी पूर्व सूचना या स्वीकृति के महीनों तक गायब रहने का आरोप लगा. सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3 का उल्लंघन करते हुए स्वेच्छाचारिता और मनमानापन दिखाया.
• बालू, कोयला और अवैध खनन में मिलीभगत : राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर बालू के अवैध उठाव को शह देना और अवैध खनन करने वालों के साथ सांठगांठ रखने का आरोप लगा.
ALSO READ : फुटबॉल ग्राउंड की जगह वकीलों के चैंबर बनाने का मामला कोर्ट के समक्ष रखा गया
