Ranchi: झारखंड के सरकारी खजाने से फर्जीवाड़े और अवैध निकासी का खेल खत्म होगा. राज्य के विभिन्न कोषागारों से अवैध तरीके से पैसे निकाले जाने के कई मामले सामने आने के बाद वित्त विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है. इसे रोकने के लिए सरकार ने वित्तीय प्रबंधन प्रणाली यानी आईएफएमएस पोर्टल को देश की दिग्गज तकनीक कंपनी प्रोटेन ई-गवर्नेंस टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ इंटीग्रेट करने का फैसला लिया है. इसका आदेश वित्त विभाग ने जारी कर दिया है. अब हर एक भुगतान से पहले बैंक खातों और पैन कार्ड का सेकंडों में डिजिटल सत्यापन होगा. विभाग ने इस सिस्टम को लागू करने का आदेश सभी उपायुक्तों और प्रमंडलीय आयुक्तों को दे दिया है.

क्यों पड़ी अचानक इस कड़े कदम की जरूरत
पिछले कुछ समय से हजारीबाग, बोकारो और पलामू समेत कई जिलों से सरकारी फंड्स की अवैध निकासी के चौंकाने वाले मामले प्रकाश में आए थे. इन मामलों पर प्रशासनिक जांच पहले से ही चल रही है. जांच में यह बात सामने आई कि कर्मचारियों और अन्य भुगतान पाने वालों के डेमोग्राफिक विवरण और बैंक खातों का सही समय पर वैलिडेट न होना इस धांधली की मुख्य वजह है. इन्हीं छेड़छाड़ और फर्जीवाड़ों पर हमेशा के लिए ताला लगाने के लिए सरकार ने यह नायाब तकनीकी सुरक्षा कवच तैयार किया है.

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कैसे काम करेगा यह नया हाई-टेक सुरक्षा चक्र
• साइलेंट बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन: यह एक एडवांस्ड खाता सत्यापन सेवा है, जिसके जरिए सरकार किसी भी बैंक खाते के विवरण का सटीक, सुरक्षित और पलक झपकते सत्यापन कर सकती है.
• ऑनलाइन पैन वेरिफिकेशन: आयकर विभाग द्वारा प्राधिकृत प्रोटेन ई-गवर्नेंस टेक्नोलॉजी लिमिटेड की इस सेवा के माध्यम से कार्यालयीय रिकॉर्ड में दर्ज पैन कार्ड का रियल-टाइम सत्यापन संभव हो सकेगा.
• क्या होगा फायदा: जैसे ही सिस्टम बैंक खाता संख्या और पैन की जांच करेगा, यदि अकाउंट नंबर या नाम में जरा सी भी गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित ‘पे आईडी’ का भुगतान तुरंत रोक दिया जाएगा. इससे जालसाज चाहकर भी सरकारी पैसे पर हाथ साफ नहीं कर पाएंगे.

