Pakur: पाकुड़ प्रखंड के मनीरामपुर गांव के प्रगतिशील किसान उत्तम सहाजी ने संरक्षित खेती को अपनाकर सफलता की एक प्रेरक कहानलिखी है. पारंपरिक खेती से जुड़े उत्तम सहाजी पहले सब्जी एवं स्ट्रॉबेरी की खेती करते थे, जिससे उन्हें लगभग 60 हजार रुपये की वार्षिक आय होती थी. सीमित आय और बढ़ती लागत के बीच उन्होंने कुछ नया करने का संकल्प लिया. उद्यान विभाग, पाकुड़ के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए 1000 वर्गमीटर क्षेत्र में शेड नेट हाउस स्थापित कर जरबेरा फूलों की खेती की शुरुआत की. संरक्षित खेती पद्धति अपनाने से उन्हें कई लाभ प्राप्त हुए. कम पानी, सीमित उर्वरक एवं नियंत्रित कीटनाशी के उपयोग से उत्पादन लागत में कमी आई, वहीं फूलों की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई.


आधुनिक तकनीक लाभकारी सिद्ध हो रही
आधुनिक तकनीक उनके लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है. वर्तमान में उत्तम सहाजी को संरक्षित फूलों की खेती से आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना दिखाई दे रही है. अनुमान है कि जरबेरा फूलों की बिक्री से उनकी वार्षिक आय 1.5 लाख रुपये से अधिक हो सकती है. जैसे-जैसे उत्पादन और विपणन की प्रक्रिया मजबूत होगी, उनकी आय में और वृद्धि होने की उम्मीद है.


