पलामू: जिला पूरे देश में ड्राई जोन माना जाता है और हर दूसरे वर्ष यहां सूखे की समस्या देखी जाती है. इस क्षेत्र के खेतों की प्यास बुझाने के लिए सोन नदी से जलाशय और नहरों तक पानी पहुंचाने की योजना बनाई गई है. इस परियोजना का उद्देश्य किसानों को वर्षा पर निर्भर रहने से बचाना और उन्हें कई फसलें उगाने में सक्षम बनाना है.

हुसैनाबाद क्षेत्र की उपेक्षा
पूर्व मंत्री कमलेश कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि परियोजना के पहले चरण में हुसैनाबाद क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने कहा, “मेरे कार्यकाल के दौरान मैंने विधानसभा में इस मामले को उठाया था और मुख्यमंत्री ने पहले चरण में छतरपुर और हुसैनाबाद के खेतों तक पानी पहुंचाने की घोषणा की थी. फिलहाल इन क्षेत्रों के केवल 12 प्रतिशत खेतों तक ही सिंचाई पहुंच रही है. किसानों को अभी भी केवल बरसात के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है.
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परियोजना के प्रमुख विवरण
परियोजना के तहत पाइपलाइन समुद्र तल से लगभग 400 मीटर ऊंचाई पर बिछाई जाएगी. पंपिंग स्कीम, पावर ग्रिड और अलग ट्रांसमिशन नेटवर्क के माध्यम से पानी जलाशयों तक पहुंचाया जाएगा. पहले चरण में छतरपुर और हुसैनाबाद के 48 हजार हेक्टेयर खेतों तक सिंचाई उपलब्ध कराने का लक्ष्य है. इस परियोजना से लगभग 2 लाख घरों तक भी पानी पहुंचाया जाएगा.
पूर्व मंत्री का आह्वान और आंदोलन की चेतावनी
कमलेश कुमार सिंह ने चेतावनी दी कि यदि पहले चरण में हुसैनाबाद को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो भारतीय जनता पार्टी जोरदार आंदोलन करने को बाध्य होगी. उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों को पानी मिलना चाहिए, लेकिन हुसैनाबाद क्षेत्र को पहले पानी मिलना चाहिए. सिंह ने विभागीय चीफ इंजीनियर से मुलाकात कर हुसैनाबाद को पहले चरण में पानी उपलब्ध कराने की मांग करने की बात कही.
किसानों की उम्मीदें
अगर परियोजना योजना के अनुसार पूरी होती है, तो सोन पाइपलाइन परियोजना पलामू के किसानों के लिए सिंचाई में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी. इससे वे वर्षा पर निर्भर नहीं रहेंगे और एक वर्ष में कई फसलें उगा सकेंगे. स्थानीय किसानों की नजर अब सरकार की कार्रवाई पर है कि क्या हुसैनाबाद को उसकी हिस्सेदारी मिलेगी.

