Delhi : सोमवार को लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी ने अपना व्यक्त दिया था. वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर राज्यसभा में जानकारी दी. पीएम मोदी ने राज्यसभा में कहा- “पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बनी परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं. मैं आज संसद के उच्च सदन और देशवासियों के सामने इन विकट परिस्थितियों पर सरकार का पक्ष रखने के लिए पेश हुआ हूं. इस युद्ध ने पूरे विश्व में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है. भारत के लिए भी ये स्थिति चिंताजनक है.
युद्ध ने हमारे व्यापार के रास्ते को किया प्रभावित : पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं. पेट्रोल-डीजल, गैस और उर्वरकों जैसे जरूरी सामानों की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है. खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं. यह भारत के लिए बड़ी चिंता है. होर्मुज में भारत के कई जहाज फंसे हैं, उनमें बड़ी संख्या में चालक दल के भारतीय सदस्य हैं. ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए. युद्ध की शुरुआत से बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की बातचीत की है.
“हम ईरान, इस्राइल और अमेरिका के साथ संपर्क में”
पीएम मोदी ने कहा हम ईरान, इस्राइल और अमेरिका के साथ संपर्क में हैं. हमारा लक्ष्य संवाद कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है. हमने होर्मुज को खोलने के लिए बात की है. वहां पर हमला अस्वीकार्य है. भारत ने नागरिकों, असैन्य ढांचों और ऊर्जा से जुड़ी बुनियादी संरचना पर हमलों का विरोध कर रहा है. भारत जहाजों की आवाजाही के लिए सतत प्रयास कर रहा है. भारत ने संवाद का ही रास्ता सुझाया है.
हार्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर हुई बात : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा- “हमने होर्मुज स्ट्रेट को खोले जाने पर भी उनसे बात की है. होर्मुज जैसे अहम शिपिंग मार्ग को बाधित किया जाना अस्वीकार्य है. भारत डिप्लोमैसी के जरिए युद्ध के इस माहौल में भी जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सतत प्रयास कर रहा है. भारत ने नागरिकों पर, नागरिकों ठिकानों पर, ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों का विरोध किया है. भारत सुरक्षित आवागम के लिए सतत प्रयास कर रहा है. भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का भी रास्ता सुझाया है. भारत का सतत प्रयास सभी पक्षों को शांति पूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है. भारतीयों सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है.”
भारतीयों की सुरक्षा अहम : पीएम
पीएम मोदी ने आगे कहा- युद्ध के बाद से तीन लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं. ईरान से एक हजार से अधिक भारतीय भारतीय भारत लौटे हैं. इनमें सात सौ से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र भारतीय हैं. यह बहुत दुखद है कि हमलों के कारण कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई है, कुछ गायब हुए हैं. जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज किया जा रहा है. विशेषतौर पर क्रूड और उर्वरक से जुड़ा परिवहन इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में होता है. युद्ध से इस क्षेत्र से आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है.
“कई देशों से एलपीजी और कच्चा तेल भारत आया”
नरेन्द्र मोदी ने कहा- “हमारी सरकार ने संवाद के माध्यम से रास्ते बनाने का प्रयास किया है. हमारी कोशिश है जहां से भी ये चीजें आसानी से भारत पहुंचे. बीते कुछ दिनों में दुनिया के अनेक देशों से कच्चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं. आने वाले दिनों में भी ये प्रयास जारी रहेंगे.
