SAURAV SINGH

रांची: झारखंड में पुलिसिंग का एक ऐसा चेहरा सामने आ रहा है जो राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है.अक्सर ट्रेनिंग के दौरान फायरिंग या लिखित परीक्षा में फेल होने वाले पुलिसकर्मी अब मैदान में अपराधियों और बड़े घोटालेबाजों पर निगरानी रखने में भी फेल हो रहे है. लापरवाही का आलम यह है कि पुलिस की कस्टडी और घेराबंदी के बावजूद आरोपी चकमा देकर भागने में सफल हो रहे हैं. हाल के महीनों में घटी कुछ प्रमुख घटनाएं झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा की है.
शराब घोटाला: पुलिस को मात देकर निकला किंगपिन:
झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में मुख्य किंगपिन और छत्तीसगढ़ का शराब कारोबारी भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया पुलिस की ढिलाई के कारण भागने में सफल रहा. इसी साल जनवरी में पुलिस टीम उसे पकड़ने छत्तीसगढ़ गई थी, लेकिन छापेमारी के दौरान टीम की सुस्ती का फायदा उठाकर वह फरार हो गया. इतना ही इससे पहले दिसंबर 2025 में शराब घोटाले के दूसरा आरोपी नवीन केडिया भी पुलिस के हाथ नहीं लगा था. हालांकि
इस बड़ी लापरवाही पर एसीबी चीफ ने जांच बैठाई, जिसमें टीम की भूमिका संदिग्ध और लापरवाह पाई गई. लापरवाही बरतने के आरोप में पूरी पुलिस टीम के 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.
पाकुड़ में सजा सुनते ही कोर्ट से भागे हत्यारे:
न्यायालय परिसर, जिसे सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है, वहां से भी कैदी भागने में सफल रहे.बीते सात जनवरी को पाकुड़ सिविल कोर्ट ने शिवधन मोहली और नरेन मोहली को हत्या के एक मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई.सजा सुनते ही दोनों कैदी पुलिस हिरासत से भाग निकले, हालांकि, पुलिस की साख पर लगे इस दाग को धोने के लिए विभाग ने तत्परता दिखाई और 24 घंटे के भीतर दोनों को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया.
जमशेदपुर में हथकड़ी खोलकर भागे चोरी के आरोपी:
जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में 21 अगस्त 2025 को हुई एक घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया था. टाटा स्टील में चोरी के आरोप में पकड़े गए दो आरोपियों को जब पुलिस एसपी ऑफिस ले जा रही थी, तब रास्ते में ही उन्होंने हथकड़ी खोल दी और फरार हो गए. पुलिस ने भारी मशक्कत के बाद एक आरोपी को तो पकड़ लिया था.

