News Desk: वैदिक पंचांग के मुताबिक इस वर्ष राम नवमी का उत्सव अलग-अलग परंपराओं के अनुसार मनाया जाएगा. आम श्रद्धालु 26 मार्च को पर्व मनाएंगे, जबकि वैष्णव परंपरा से जुड़े लोग 27 मार्च को इसे मनाएंगे. इस शुभ अवसर पर भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना, मंत्रों का जप और हवन करना अत्यंत फलदायी माना गया है.
इस विधि से करें पूजा:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, विशेषकर पीले रंग के कपड़े पहनें.
- एक साफ स्थान पर चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं.
- भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
- हाथ में जल और अक्षत लेकर पूजा या व्रत का संकल्प लें.
- भगवान की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं और चंदन का तिलक लगाकर नए वस्त्र अर्पित करें.
- पीले फूल चढ़ाकर विधि-विधान से पूजन करें.
- मिठाई, केसर भात, पंचामृत और धनिया पंजीरी का भोग लगाएं, साथ में तुलसी दल जरूर रखें.
- पूजा के दौरान रामरक्षा स्तोत्र या रामचरितमानस का पाठ करें.
- दोपहर में शंख ध्वनि के साथ भगवान राम का जन्मोत्सव मनाएं.
- धूप, दीप और कपूर से आरती कर प्रसाद वितरित करें.
- व्रत रखने वाले लोग पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें.
राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त:
इस वर्ष राम नवमी का शुभ मध्याह्न काल सुबह 11:13 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:41 बजे तक रहेगा. यही वह पावन समय माना जाता है, जब भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है.
इन मंत्रों का करें जाप
- ॐ श्री रामाय नमः
- ॐ श्री रामचन्द्राय नमः
- ॐ रां रामाय नमः
- श्रीराम तारक मंत्र – श्री राम, जय राम, जय जय राम
- श्रीराम गायत्री मंत्र– ॐ दाशरथये विद्महे, सीतावल्लभाय धीमहि।
तन्नो रामः प्रचोदयात्॥
6.श्री राम रक्षा मंत्र– ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः॥
इन मंत्रों का श्रद्धा और शांति के साथ जाप करने से मन को शांति मिलती है और भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
हवन की आसान विधि, जानें पूर्णाहुति का सही तरीका
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें.
- शुभ समय में हवन कुंड स्थापित करें और उसमें आम की लकड़ी, उपले और कपूर की मदद से अग्नि जलाएं.
- हवन शुरू करने से पहले हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर संकल्प लें तथा भगवान गणेश का ध्यान करें.
- इसके बाद माता दुर्गा और भगवान राम का स्मरण करते हुए हवन सामग्री, जौ, तिल और घी से आहुति दें.
- परंपरा के अनुसार करीब 108 आहुतियां देना शुभ माना जाता है.
- अंत में सूखे नारियल में बची हुई सामग्री भरकर पूर्णाहुति के रूप में अग्नि को समर्पित करें.
- हवन पूरा होने के बाद कपूर से भगवान राम की आरती करें.
DISCLAIMER: इस लेख में दी गई जानकारी, उपाय और सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किए गए हैं. यहां दी गई बातें विभिन्न स्रोतों जैसे पंचांग, धार्मिक मान्यताओं, विद्वानों और पारंपरिक कथाओं पर आधारित हैं. हम इस जानकारी की पूर्ण सत्यता या सटीकता का दावा नहीं करते. पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी बात को अपनाने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें. यह लेख अंधविश्वास को बढ़ावा देने के लिए नहीं है, बल्कि सामान्य जानकारी साझा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.
