Ranchi: रांची के बुढ़मू प्रखंड का गम्हरिया गांव आज एक बड़े सामाजिक टकराव का केंद्र बन गया. पारंपरिक 21 पाढ़ा के आदिवासी समाज ने एकजुट होकर रोहन कुजूर की तथाकथित ‘पाढ़ा सरकार’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. मामला अक्टूबर 2025 में एक पाहन परिवार के साथ हुई दरिंदगी और धान लूट से जुड़ा है. इसका हिसाब करने आज हज़ारों आदिवासी मैदान में उतर आए.
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मानवता को शर्मसार करने वाली करतूत
आरोप है कि अक्टूबर 2025 में रोहन कुजूर के नेतृत्व वाली ‘पाढ़ा सरकार’ के लोगों ने दबंगई दिखाते हुए गांव के पाहन का धान जबरन काट लिया था. विरोध करने पर पाहन और उसके पूरे परिवार को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया.
गर्भ में मासूम की मौत : इस हिंसक हमले में परिवार की एक गर्भवती महिला को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण उसके पेट में ही बच्चे की मौत हो गई. इस घटना ने पूरे आदिवासी समाज के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर दिया था.
धान की अवैध ज़ब्ती : लूटा गया धान पिछले कई महीनों से सामुदायिक भवन में रखा हुआ था.
आज की कार्रवाई : सामुदायिक भवन का ताला टूटा, पाहन को मिला उसका हक. धान को कब्जे में लिया.
गम्हरिया पहुंची आक्रोशित भीड़
आज सुबह से ही 21 पाढ़ा के लोग गम्हरिया पहुंचने लगे थे. आक्रोशित भीड़ ने सामुदायिक भवन में रखे धान को अपने कब्जे में ले लिया और उसे वापस पीड़ित पाहन के घर पहुंचाया गया. आरोप लगाया गया कि रोहन कुजूर पाढ़ा व्यवस्था के नाम पर मासूम आदिवासियों को गुमराह कर रहा है. वह अपनी निजी सत्ता चलाकर आदिवासियों का शोषण कर रहा है. आज 21 पाढ़ा ने यह साफ कर दिया है कि गुंडागर्दी और झूठ का अंत निश्चित है.

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विस्फोटक स्थिति : आमने-सामने दो गुट
गम्हरिया में माहौल इस वक्त बेहद तनावपूर्ण है. एक तरफ 21 पाढ़ा के लोग न्याय के लिए डटे हैं, तो दूसरी तरफ रोहन कुजूर की पाढ़ा सरकार के समर्थक भी वहां पहुंच चुके हैं.
हिंसा की आशंका : दोनों तरफ से लोग एक-दूसरे से भिड़ने के लिए तैयार खड़े हैं.
भारी आक्रोश : 21 पाढ़ा के लोगों का कहना है कि रोहन कुजूर आदिवासियों को अपने फायदे के लिए मोहरा बना रहा है और आज उसकी असलियत सबके सामने आ गई है.
