रांची: विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के चौथे दिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधनों को इतना मजबूत करेगी कि केंद्र के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़े. उन्होंने कहा कि राज्य में बेहतर वित्तीय प्रबंधन सरकार की प्राथमिकता है. सदन ने ध्वनिमत से 6450 करोड़ रुपये का तृतीय अनुपूरक बजट पारित कर दिया.

ऋण प्रबंधन पर सरकार का दावा
अनुपूरक बजट पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि एफआरबीएम एक्ट के तहत राज्य जीडीपी के तीन प्रतिशत से अधिक ऋण नहीं ले सकता. उन्होंने बताया कि झारखंड देश का पहला राज्य है जिसने अब तक तीन प्रतिशत से कम, यानी 2.2 प्रतिशत ऋण लिया है. उन्होंने कहा कि राज्य अभी भी बाजार से 8 हजार करोड़ रुपये तक ऋण ले सकता है. तुलना करते हुए बताया कि बिहार 6.6 प्रतिशत और महाराष्ट्र पांच प्रतिशत से अधिक ऋण ले चुका है. पहले और दूसरे अनुपूरक बजट की 22,995 करोड़ रुपये, यानी 54 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है.
मार्च तक 90 प्रतिशत खर्च का लक्ष्य
वित्त मंत्री ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट की 90 प्रतिशत राशि मार्च तक खर्च हो जाएगी. तृतीय अनुपूरक बजट के 6450 करोड़ रुपये में से 5583 करोड़ योजना मद और 867 करोड़ स्थापना मद के लिए है. इसमें 1717 करोड़ मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, 778 करोड़ महिला एवं बाल विकास, 658 करोड़ पंचायती राज, 584.84 करोड़ ग्रामीण विकास, 287 करोड़ स्वास्थ्य, 281.16 करोड़ ऊर्जा, 178 करोड़ जल संसाधन और 129 करोड़ वन विभाग के लिए निर्धारित है. यह बजट कमिटमेंट लाइबिलिटी को पूरा करने के लिए लाया गया है.
सीडी रेशियो पर चिंता
वित्त मंत्री ने बताया कि देश का औसत सीडी रेशियो 70 से 78 प्रतिशत के बीच है, जबकि झारखंड का सीडी रेशियो 52.28 प्रतिशत है. चार वर्ष पहले यह 48 प्रतिशत था. उन्होंने निर्देश दिया कि जिन बैंकों का प्रदर्शन खराब है, उनमें सरकारी धन नहीं रखा जाए. साथ ही अधिकारियों को उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करने का निर्देश दिया.
पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं

- नीरा यादव ने कहा कि अधिकारी अनुपयोगी योजनाओं में खर्च कर रहे हैं और जनप्रतिनिधियों को उद्घाटन या शिलान्यास में नहीं बुलाया जाता. उन्होंने स्कूलों में अव्यवस्था और खदानों में जमा पानी का उपयोग सिंचाई के लिए करने की मांग की.
- उदय शंकर सिंह ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए तृतीय अनुपूरक बजट आवश्यक है और तमाम अड़चनों के बावजूद पेसा कानून लागू किया गया है.
- कुमार उज्ज्वल ने आरोप लगाया कि कृषि योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और बारिश से हुई क्षति का लाभ किसानों को नहीं मिला. उन्होंने जर्जर भवनों का सर्वेक्षण और 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की.
- आलोक सोरेन ने कहा कि यह बजट जनकल्याणकारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए है. उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के माध्यम से वोट चोरी की साजिश हो रही है और केंद्रीय बजट में झारखंड को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला.
- सुरेश बैठा ने कहा कि राज्य सरकार जनता के हित में कार्य कर रही है और पेसा कानून लागू किया गया है.
- जयराम महतो ने कहा कि मूल बजट की आधी राशि भी खर्च नहीं हुई और एक ही वित्तीय वर्ष में तीन अनुपूरक बजट लाए गए. उन्होंने सीडी रेशियो को 60 से 70 प्रतिशत तक लाने की मांग की. साथ ही दिव्यांग और विधवा को मइया सम्मान योजना के तहत 2500 रुपये देने तथा सिख दंगा पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग उठाई.
