आधी आबादी का शक्ति वंदन, चैंबर की महिला उद्यमियों ने किया सशक्तिकरण का शंखनाद

RANCHI: लोकतंत्र की चौखट से लेकर संसद की दहलीज तक अब महिलाओं की गूंज और भी प्रभावी होने वाली है. केंद्र सरकार...

RANCHI: लोकतंत्र की चौखट से लेकर संसद की दहलीज तक अब महिलाओं की गूंज और भी प्रभावी होने वाली है. केंद्र सरकार के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर राजधानी रांची की महिला उद्यमियों और पेशेवरों ने एक सुर में इसे नए भारत के निर्माण का सबसे बड़ा अध्याय करार दिया है. फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बैनर तले जुटीं इन प्रबुद्ध महिलाओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक आरक्षण नहीं, बल्कि देश की नीति निर्धारण में महिलाओं की मेधा को शामिल करने का ऐतिहासिक इन्विटेशन है.

नीति निर्धारण में अब विजन भी और संवेदना भी
चैंबर भवन में आयोजित एक विशेष संवाद के दौरान महिला उद्यमियों ने इस बात पर जोर दिया कि जब संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिलाएं बैठेंगी, तो राजनीति केवल पावर का केंद्र नहीं बल्कि संवेदनशीलता और जवाबदेही का मॉडल बनेगी. कार्यकारिणी सदस्य विनीता सिंघानिया ने कहा कि महिलाओं के आने से जनप्रतिनिधित्व में एक नया दृष्टिकोण जुड़ेगा, जो अधिक समावेशी होगा.

आर्थिक और सामाजिक क्रांति का सूत्रपात
चैंबर की प्रमुख सदस्य पूनम आनंद ने आगामी 16–17 अप्रैल की तारीख को मील का पत्थर बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताया. वहीं सीए मनीषा बियानी और आस्था किरण ने इसे एक ऐसा परिवर्तनकारी कदम बताया जो कागजी सशक्तिकरण को धरातल पर वास्तविक ताकत में बदल देगा.

किसने क्या कहा
• समावेशी विकास: डॉ. सुमन दुबे के अनुसार स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर अब महिलाओं की सीधी पकड़ होगी, जो देश को विश्व शक्ति बनाने के लिए अनिवार्य है.

• विकसित भारत @2047: सीए साक्षी जैन ने रेखांकित किया कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना महिलाओं की सक्रिय राजनीतिक भागीदारी के बिना अधूरा है.

• सामाजिक कवच: सीए श्रद्धा बागला ने माना कि यह आरक्षण महिलाओं को स्वच्छता और शिक्षा जैसे जमीनी मुद्दों पर निर्णय लेने की प्रभावी शक्ति प्रदान करेगा.

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