रांची: झारखंड के बहुचर्चित 32 करोड़ रुपये के सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. चाईबासा स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता और सीआईडी द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत तीन मुख्य आरोपियों को दोषी करार दिया है. मंगलवार को एसीबी के विशेष न्यायाधीश पीयूष श्रीवास्तव की अदालत ने इस मामले पर अपना अंतिम निर्णय सुनाया. अदालत ने सुनील कुमार सत्पति (तत्कालीन शाखा प्रबंधक), मनीष देवगम (बैंक कर्मचारी) और संजय डालमिया (व्यवसायी)को घोटाले का मुख्य सूत्रधार और दोषी माना. फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद, न्यायालय के आदेश पर तीनों दोषियों को पुलिस हिरासत में ले लिया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.
सीआईडी के तत्कालीन एडीजी अनिल पालटा के नेतृत्व में हुई थी बेहतर अनुसंधान:
अदालत ने दोषियों को सजा सुनाने के लिए 30 मार्च की तिथि निर्धारित की है.उस दिन बहस के बाद यह स्पष्ट होगा कि इन तीनों को कितने वर्ष के कारावास और कितने जुर्माने की सजा दी जाएगी. यह पूरा मामला वर्ष 2019 में सामने आया था, जब सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की बात उजागर हुई थी. इस घोटाले के संबंध में वर्ष 2019 में सरायकेला थाने में मामला दर्ज किया गया था. मामले की संवेदनशीलता और बड़ी राशि (32 करोड़ रुपये) के गबन को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच सीआईडी को सौंपी थी. उस समय सीआईडी के एडीजी अनिल पालटा के निर्देश पर इस मामले की जांच शुरू हुई थी और बेहतर अनुसंधान के वजह से सभी आरोपी दोषी करार दिए हुए.
