बुंडू: सरहुल के पावन अवसर पर बुंडू में आयोजित भव्य पारंपरिक कार्यक्रम ने आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया. इस खास मौके पर विकास कुमार मुंडा अपने परिवार के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की.

मांदर की थाप पर झूमे विधायक
पर्व के दौरान पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला. मांदर और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच जब विकास कुमार मुंडा अपनी पत्नी गरिमा सिंह मुंडा के साथ पारंपरिक नृत्य में शामिल हुए, तो पूरा माहौल उत्साह से भर उठा. दोनों को स्थानीय लोगों के साथ थिरकते देख कार्यक्रम स्थल तालियों और जयकारों से गूंज उठा. उनकी सहज भागीदारी ने लोगों के दिलों को छू लिया.
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ग्रामीणों की भारी भागीदारी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी रही. महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे लोकनृत्य करते नजर आए. मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों पर लोग देर रात तक झूमते रहे. सरहुल पर्व के माध्यम से प्रकृति के प्रति आस्था, संस्कृति के प्रति गर्व और सामूहिक एकता की भावना साफ झलकती रही.
विधायक का संदेश
विकास कुमार मुंडा ने क्षेत्रवासियों को सरहुल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और परंपराओं को सहेजने की प्रेरणा देता है.
भव्य आयोजन में दिखा जनसैलाब
इस आयोजन ने न सिर्फ संस्कृति को सहेजने का संदेश दिया, बल्कि बुंडू की पहचान को नई ऊर्जा और गौरव के साथ प्रस्तुत किया. इस दौरान बुंडू नगर पंचायत के नव निर्वाचित अध्यक्ष जितेंद्र उरांव, अरविंद कुमार, आनंद कुमार, प्रदीप मुंडा, राजकुमार विंझिया उर्फ फेकला गोंझू और भवानी मुंडा सहित कई लोग मौजूद रहे.

