रांची: झारखंड में सरकारी कंपनियों का घोटाला सामने आया है. एजी रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है.

निदेशक मंडल की बैठकें नहीं हुईं
कंपनी ने 2019-20 और 2022-23 के बीच निदेशक मंडल की केवल छह बैठकें आयोजित की, जबकि इस अवधि के लिए 16 बैठकें करनी थी. कंपनी के वार्षिक खाते अपनी स्थापना (जून 2010) से ही बकाया हैं. कंपनी के जिला कार्यालयों द्वारा बुनियादी लेखा अभिलेख, जैसे रोकड़ बही आदि का रखरखाव नहीं किया जाता था.
क्या हुई है अनियमितता
• कंपनी ने 2018-19 के लिए अनंतिम खाते तैयार करने, आयकर रिटर्न दाखिल करने और ऋण प्राप्त करने के लिए दो अलग-अलग चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों को नियुक्त किया.
• बैंक ऑफ इंडिया और भारतीय स्टेट बैंक को एल 1 बोलीदाताओं के रूप में चुना गया, 776 करोड़ के कार्यशील पूंजी मांग ऋण के लिए 4.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की निश्चित ब्याज दर की पेशकश कर रहे थे.
• कंपनी ने फ्लोटिंग दर पर 40.68 करोड़ का भुगतान किया, जिसके परिणामस्वरूप 7.70 करोड़ का अतिरिक्त ब्याज भुगतान हुआ.
• झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) द्वारा वितरण ट्रांसफार्मर (डीटीआर) मीटर और मॉडेम में संचार उपकरण (सिम) की स्थापना न करने से न केवल चार शहरों में डीटीआर मीटर की स्थापना का उद्देश्य विफल हो गया, बल्कि जुलाई 2020 से 4.31 करोड़ रुपये का निष्क्रिय व्यय भी हुआ.
• झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड (जेयूयूएनएल) के प्रबंध निदेशक ने एकल निविदा के आधार पर मरम्मत कार्य सौंपने के लिए शक्ति प्रत्यायोजन (डीओपी) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप पावरहाउस उपकरणों की मरम्मत के लिए कार्य आदेश को अंतिम रूप देने में विलंब हुई.

