महा झींगा पालन से जनजातीय आजीविका को नई दिशा, गुमला बना मॉडल जिला

  गुमला: जिला में मत्स्य पालन क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देते हुए महा झींगा (स्कैम्पी) पालन के माध्यम से जनजातीय समुदायों...

 

गुमला: जिला में मत्स्य पालन क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देते हुए महा झींगा (स्कैम्पी) पालन के माध्यम से जनजातीय समुदायों की आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है.उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के मार्गदर्शन एवं जिला मत्स्य पदाधिकारी कुसुम लता के नेतृत्व में अल्प-उपयोगित जलाशयों में महा झींगा पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है.

तकनीकी सहयोग और क्रियान्वयन

 यह पहल आईसीएआर-सीआईएफआरआई बैरकपुर के तकनीकी सहयोग से संचालित हो रही है और मत्स्य पालन विभाग, झारखंड द्वारा प्रभावी रूप से लागू की जा रही है. राज्य के अन्य जिलों में स्कैम्पी पालन की सफल कहानियों पर आधारित यह प्रयास गुमला जिले के मसरिया एवं धनसिंहटोली जलाशयों में नए आयाम स्थापित कर रहा है.

संचयन में महत्वपूर्ण सफलता

मार्च 2026 के अंतिम पखवाड़े में डॉ. ए. के. दास की टीम ने सक्रिय रूप से स्कैम्पी किशोरों का भंडारण किया. 27 मार्च को मसरिया जलाशय में 2.442 लाख और 28 मार्च को धनसिंहटोली जलाशय में 2.5373 लाख स्कैम्पी किशोरों का सफल संचयन किया गया.

आदिवासी आजीविका और आत्मनिर्भरता

उपायुक्त ने कहा कि इस प्रकार की अभिनव पहलें न केवल जनजातीय समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करेंगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी मददगार साबित होंगी. इस मॉडल को राज्य परियोजना के तहत और व्यापक रूप में लागू करने की योजना है.

मत्स्य विभाग द्वारा संचालित यह पहल केंद्र स्तर पर भी सराही जा रही है और इसे देश के अन्य राज्यों में लागू करने पर विचार किया जा रहा है. झारखंड में ‘जलाशयों में पिंजरा संस्कृति’ की तरह महा झींगा पालन मॉडल भी ग्रामीण मछुआरा समुदायों की आजीविका सुदृढ़ करने में एक प्रभावी कदम साबित होगा.

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