सरायकेला-खरसावां: जिले में कोयला माफिया का बड़ा खेल सामने आया है. चांडिल थाना क्षेत्र के दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और ईको-सेंसिटिव जोन के पास एनएच-33 (टाटा–रांची हाईवे) स्थित रामगढ़ एलिफेंट कॉरिडोर के पास एक वेयरहाउस में अवैध रूप से कोयला और स्क्रैप का कारोबार चलने का आरोप है.

फ्लाईओवर के नीचे स्क्रैप टाल का संचालन
बताया जा रहा है कि आसनबनी और रामगढ़ के बीच बने फ्लाईओवर ब्रिज के नीचे अवैध स्क्रैप टाल का संचालन किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां बड़े पैमाने पर कोयला, आयरन, स्टील और लोहे की रॉड जैसी सामग्री की कार्टिंग की जाती है.
एलिफेंट कॉरिडोर पर भी पड़ रहा असर
यह इलाका दलमा सेंचुरी के ईको-सेंसिटिव जोन और एलिफेंट कॉरिडोर में आता है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस अवैध गतिविधि के कारण हाथियों के झुंड का प्राकृतिक मार्ग प्रभावित हो रहा है और वे रास्ता बदलकर दूसरे इलाकों की ओर जा रहे हैं.
जमशेदपुर से आकर सक्रिय हैं स्क्रैप माफिया
सूत्रों के अनुसार जमशेदपुर शहरी क्षेत्र से आने वाले स्क्रैप माफिया बड़े-बड़े ट्रिप ट्रेलर वाहनों से कोयला और अन्य सामग्री की कार्टिंग कर रहे हैं. आरोप है कि धनबाद, रामगढ़ और ओडिशा से आने वाले कोयले को यहां उतारकर अवैध तरीके से कारोबार किया जा रहा है.
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कैमरा देखते ही मौके से फरार हुए लोग
मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि वेयरहाउस में कोयला और अन्य सामग्री मौजूद थी. हालांकि कैमरा देखते ही वहां मौजूद लोग फरार हो गए. एक वाहन चालक से पूछताछ करने पर उसने सिर्फ इतना बताया कि कोयला ओडिशा से लाया गया है, लेकिन वह कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सका.
कार्रवाई की बात, लेकिन सवाल बरकरार
इस मामले में जब एसडीपीओ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यदि अवैध कारोबार की पुष्टि होती है तो दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि स्थानीय लोगों का सवाल है कि एलिफेंट कॉरिडोर और ईको-सेंसिटिव जोन जैसे संवेदनशील इलाके में इतने बड़े स्तर पर अवैध कारोबार कैसे चल रहा है और अब तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
हाथियों के प्राकृतिक मार्ग पर खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि दलमा क्षेत्र हाथियों के विचरण का महत्वपूर्ण इलाका है. यहां बढ़ती अवैध गतिविधियों के कारण उनका प्राकृतिक मार्ग लगातार प्रभावित हो रहा है, जिस पर प्रशासन और वन विभाग को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है.

