लोहरदगा: जिले के सेन्हा प्रखंड अंतर्गत अलौदी पंचायत के रानीगंज बाजार टांड में स्वशासन पड़हा व्यवस्था के तहत पत्थरगड़ी कार्यक्रम की प्रथम वर्षगांठ श्रद्धा, परंपरा और उत्साह के साथ मनाई गई. यह आयोजन 15 पड़हा गढ़कसमार के नेतृत्व में किया गया, जिसमें आसपास के विभिन्न गांवों से आदिवासी समाज के सैकड़ों महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए.

अध्यक्षता और मुख्य उद्देश्य
कार्यक्रम की अध्यक्षता अलौदी पंचायत के उपमुखिया सह व्यवस्थापक गोपाल उरांव ने की. इस अवसर पर जिलापरिषद सदस्य राधा तिर्की ने अपने संबोधन में कहा कि पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था को समाज के बीच पुनः स्थापित करना ही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था आदिवासी समाज की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त माध्यम है.
वर्षगांठ का ऐतिहासिक संदर्भ

विदित हो कि 30 मार्च 2025 को रानीगंज बाजार बगीचा में 15 गढ़कसमार बेल के नेतृत्व में पत्थरगड़ी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. उसी के उपलक्ष्य में इस वर्ष प्रथम वर्षगांठ मनाई गई. वर्षगांठ के अवसर पर पहान, पुजार, महतो एवं कोटवार द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई. पूरे आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष ध्यान रखा गया.
स्वशासन पड़हा व्यवस्था और सामाजिक संदेश
गोपाल उरांव ने जानकारी देते हुए बताया कि स्वशासन पड़हा व्यवस्था के माध्यम से आदिवासी समाज अपने सरना, मसना, भुईहरि जैसे धार्मिक स्थलों को संरक्षित करने के साथ-साथ सामाजिक परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह पहल समाज को जागरूक करने, नशापान से दूर रहने तथा विवाह, पर्व-त्योहारों में पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है.
सांस्कृतिक संरक्षण और जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान पहान एवं पुजारों ने समाज के लोगों से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखें और आने वाली पीढ़ी को भी इससे अवगत कराएं. साथ ही, सरकार द्वारा लागू पेसा कानून के प्रावधानों की भी जानकारी दी गई.
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति और सहभागिता
इस अवसर पर कुलेश्वर उरांव, सुकरा उरांव, भुखला उरांव, बिगन खेरवार, चमरा मुंडा, लक्ष्मण टाना भगत, जयराम उरांव, विश्वनाथ प्रधान, भोला उरांव, बुधराम उरांव, शनिराम उरांव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. इसके अलावा जिला पड़हा संयोजक बिनोद भगत, विजय उरांव, शिवशंकर टाना भगत, संजीव भगत, जतरु उरांव, रामचंद्र उरांव, बलराम उरांव, दहरु पहान, रामजीत उरांव एवं कोटवार लक्ष्मण टाना भगत सहित विभिन्न पड़हा के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही.
एकता और पारंपरिक संस्कृति का संदेश
पूरे कार्यक्रम में पारंपरिक संस्कृति, एकता और सामाजिक जागरूकता का संदेश प्रमुख रूप से देखने को मिला.
