रांची: झारखंड विधानसभा में अंचल कार्यालयों (सीओ ऑफिस) की कार्यप्रणाली को लेकर विधायकों ने सरकार को घेरा. सदन में नीरा यादव, सीपी सिंह और मनोज यादव समेत कई विधायकों ने एक सुर में कहा कि आम जनता और छात्र ब्लॉक के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं, लेकिन बिना सुविधा शुल्क के कोई काम नहीं हो रहा है.
विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री दीपक बिरुआ ने सरकार का बचाव किया. उन्होंने कहा कि राज्य में 2011 से ‘राइट टू सर्विस’ (सेवा का अधिकार अधिनियम) लागू है, जिसमें हर काम के लिए समय सीमा निर्धारित है.मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई अंचल अधिकारी निर्धारित समय के भीतर काम नहीं करता या अधिनियम का उल्लंघन करता है, तो जांच के बाद उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

म्यूटेशन और सो-मोटो सिस्टम पर सवाल:
विधायक नीरा यादव ने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जमीन निबंधन के बाद दाखिल-खारिज कराने और अन्य जरूरी प्रमाण पत्र लेने में जनता को भारी किल्लत हो रही है. उन्होंने कहा वर्ष 2022 से लागू ‘सो-मोटो दाखिल-खारिज सिस्टम जमीन पर प्रभावी नहीं दिख रहा है. बच्चों को प्रमाण पत्र देने के लिए विशेष कैंप लगाए जाने चाहिए.
कलेजे पर हाथ रखकर बोलें मंत्री:
पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक सीपी सिंह ने बेहद तल्ख तेवर अपनाते हुए मंत्री दीपक बिरुआ से सीधा सवाल किया।उन्होंने कहा, मंत्री बनने से पहले आप भी विधायक थे.जरा कलेजे पर हाथ रखकर बताइए, क्या आप नहीं जानते कि क्या हो रहा है? हम विधायकों का आधा दिन सीओ ऑफिस की शिकायतों को सुलझाने में ही गुजर जाता है.सीपी सिंह ने आगे कहा कि कानून बनाने मात्र से अपराध और भ्रष्टाचार नहीं रुकता.एक ही प्लॉट पर बार-बार म्यूटेशन होना ‘निर्लज्जता की हद’ है. उन्होंने मांग की कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसी को भी कार्यालय में रिश्वत न देनी पड़े और समय पर काम न करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो. इसके जवाब में मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि बच्चों के जाति, आवासीय और आय प्रमाण पत्र जैसे मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए विभाग की ओर से एक बार फिर से कड़ा आदेश जारी किया जाएगा.

