गुमला: प्राचीन परंपराओं के साथ निकला भव्य जुलूस, हर उम्र के लोगों ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा

गुमला: झारखंड में मनाया जाने वाला सरहुल पर्व पूरी तरह से प्रकृति से जुड़ा हुआ है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है...

गुमला: झारखंड में मनाया जाने वाला सरहुल पर्व पूरी तरह से प्रकृति से जुड़ा हुआ है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आज भी इस पर्व में आधुनिकता का प्रभाव नहीं देखने को मिलता है. पूरी तरह प्राचीन परंपराओं के साथ इस पर्व को मनाया जाता है. गुमला जिले में निकले सरहुल जुलूस में भी पारंपरिक स्वरूप की शानदार झलक देखने को मिली, जहां एक जैसी वेशभूषा में महिलाएं, पुरुष और नन्हे बच्चे नजर आए.

परंपरा में रचा-बसा उत्सव

जुलूस के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से एक शानदार माहौल बनाया गया. यह साफ दिखा कि जहां अन्य पर्व-त्योहारों पर आधुनिकता का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, वहीं सरहुल आज भी अपनी मूल पहचान के साथ मनाया जा रहा है. लोग सखुआ के फूल को अपने कानों में लगाकर प्रकृति से जुड़े रहने का संकल्प लेते नजर आए.

हर वर्ग की भागीदारी

इस पर्व के दौरान बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी एक साथ एक ही रंग में रंगे नजर आए. गुमला जिला मुख्यालय में निकलने वाला सरहुल जुलूस हर साल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है. इस पर्व से जुड़े लोग तो इसमें उत्साह के साथ शामिल होते ही हैं, वहीं अन्य समुदाय के लोग भी इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में कतारबद्ध होकर खड़े रहते हैं.

स्वयं व्यवस्था संभालते हैं लोग

इस दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन खास बात यह है कि सरहुल से जुड़े लोग खुद ही व्यवस्था को संभालते हैं. यही वजह है कि इस पर्व का महत्व आज भी बरकरार है और इसे शांति और अनुशासन के साथ मनाया जाता है.

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प्रकृति से जुड़ाव का संदेश

जिले के विभिन्न इलाकों से निकले जुलूस मुख्यालय पहुंचकर भव्य शोभायात्रा का रूप लेते हैं. यह संदेश देता है कि मानव जीवन का संबंध हमेशा से प्रकृति से रहा है और आगे भी बना रहेगा. इस दृश्य को देखकर लोगों को एक अलग ही खुशी का अनुभव होता है.

समिति और सामाजिक सहयोग की अहम भूमिका

सरहुल पर्व के सफल आयोजन के लिए सरहुल केंद्रीय समिति का गठन किया जाता है, जो पूरे कार्यक्रम को सुचारु रूप से संचालित करती है. वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रिय रहते हैं. इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी देखने को मिलती है, जो जुलूस में शामिल लोगों को पानी, शरबत और चना उपलब्ध कराते हैं, जिससे उत्साह बना रहता है. यह सामाजिक एकता और सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है.

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