हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्याल, हजारीबाग के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा को 12 मार्च को वर्ष 2025–26 के लिए “टीचर एजुकेटर ऑफ द ईयर” पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन्हें इंडियन एसोसिएशन ऑफ टीचर एजुकेटर्स द्वारा सिक्किम के गैंगटोक में आयोजित वार्षिक सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया.

शिक्षा मंत्री और कुलपति ने संयुक्त रूप से किया सम्मानित
प्रो. शर्मा को यह पुरस्कार सिक्किम के शिक्षा मंत्री श्री राजू बस्नेत तथा सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. के. स्वैन द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया. यह पुरस्कार देश के विशिष्ट शिक्षक-शिक्षाविदों को दिया जाता है और शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है.
एस. एन. मुखर्जी स्मृति व्याख्यान देने का मिला आमंत्रण
इस अवसर पर प्रो. शर्मा को प्रतिष्ठित एस. एन. मुखर्जी स्मृति व्याख्यान देने के लिए भी आमंत्रित किया गया. उन्होंने “Respected Teachers Teach Better” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया.
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शिक्षकों के प्रति घटते सम्मान पर जताई चिंता
अपने संबोधन में उन्होंने समकालीन समाज में शिक्षकों के प्रति सम्मान और विश्वास में आ रही गिरावट की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए शिक्षकों तथा शिक्षक-शिक्षाविदों की गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है.
फिनलैंड और स्वीडन की शिक्षा प्रणाली का दिया उदाहरण
प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने विश्व के विकसित देशों में शामिल फिनलैंड और स्वीडन की शिक्षा प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों में शिक्षकों को पर्याप्त पेशेवर स्वतंत्रता, स्वायत्तता और विश्वास प्राप्त है. इसी कारण वहां की शिक्षा व्यवस्था मजबूत और प्रभावी मानी जाती है.
शिक्षा जगत की सच्चाई सामने लाने का आह्वान
उन्होंने शिक्षकों और शिक्षक-शिक्षाविदों से आह्वान किया कि वे साहसपूर्वक सत्य बोलें और शिक्षा जगत की वास्तविकताओं को समाज के सामने रखें. अपने व्याख्यान के अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षकों के प्रति सम्मान को पुनः स्थापित करना एक सशक्त और मूल्य-आधारित शिक्षा व्यवस्था के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है.
विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने जताई खुशी
कुलपति की इस उपलब्धि पर शिक्षक समुदाय, विशेषकर विनोबा भावे विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शिक्षाविदों ने गर्व और प्रसन्नता व्यक्त की है.

