Hazaribagh: भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग प्रशासन ने 17 शिक्षककेत्तर कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इनमें से अधिकांश कर्मचारी औचक निरीक्षण के दौरान अपने-अपने दफ्तर में बिना छुट्टी लिए अनुपस्थित पाए गए थे.
लगातार मिल रही थीं शिकायतें
इस संबंध में जानकारी देते हुए रविवार को कुलसचिव डॉ. प्रणिता ने बताया कि कुछ कर्मचारी समय पर नहीं आते हैं और बिना सूचना के अनुपस्थित रहते हैं. इसकी मौखिक शिकायत लगातार मिल रही थी. कार्रवाई से पहले उन्होंने स्वयं औचक निरीक्षण किया. इस दौरान जो लोग बिना लिखित सूचना के अनुपस्थित पाए गए, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है.
कार्यप्रणाली पर असर
उन्होंने कहा कि यह गलत परिपाटी है और इससे विश्वविद्यालय के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था. ऐसे कर्मचारियों के कारण समय पर काम करने वालों का मनोबल भी प्रभावित होता है. विश्वविद्यालय का कार्य प्रभावित होने से सीधा नुकसान विद्यार्थियों को होता है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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तीन दिन का समय फिर कार्रवाई की चेतावनी
कर्मचारियों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए. उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मामले से कुलपति को अवगत कराया जाएगा.
कुलसचिव ने जताई नाराजगी
कुलसचिव ने बताया कि हाल ही में प्रभारी कुलपति डॉ. रेनू बोस को कुलपति कक्ष में नहीं बैठने देने की घटना से वह आहत हैं. उन्होंने कहा कि प्रो. चंद्र भूषण शर्मा के बारे में उनके अनुभव के आधार पर ऐसा आदेश दिया गया हो, यह विश्वास करना कठिन है.
पद का दुरुपयोग का आरोप
उन्होंने कहा कि इस अमर्यादित आचरण के लिए जिम्मेदार कर्मचारी विश्वविद्यालय सेवा में नियमित नहीं है, बल्कि अनुबंध पर प्रबंधन विभाग में नियुक्त है. कुलपति कार्यालय की गोपनीयता और पद का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप उस पर लगे हैं. इस घटना से विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचा है.
प्रशासनिक दिक्कतें
डॉ. रेनू बोस समाज विज्ञान की संकायाध्यक्ष हैं और उनका कार्यालय प्रशासनिक भवन से दूर रविंद्रनाथ टैगोर कला भवन में स्थित है. कुलपति के रूप में कार्यों के निष्पादन के लिए सचिवालय के सहयोग की आवश्यकता होती है. सभी फाइलों को एक भवन से दूसरे भवन ले जाना व्यावहारिक नहीं है.
कुलसचिव कार्यालय से काम
कुलसचिव ने बताया कि जब कुलपति कक्ष नहीं खोला गया, तब उन्होंने डॉ. रेनू बोस से कुलसचिव कार्यालय से ही कार्य निष्पादित करने का आग्रह किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया.
नियमों पर सख्ती
ज्ञात हो कि डॉ. रेनू बोस और डॉ. प्रणिता दोनों ही कड़े प्रशासक माने जाते हैं और नियमों के तहत काम करने के लिए जानी जाती हैं. किसी भी दबाव में आकर गलत काम करने वालों में इनकी गिनती नहीं होती है.
