Cahibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के साथ-साथ आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. नियमित उपचार, चिकित्सकीय परामर्श तथा जीवनशैली में आवश्यक बदलाव से मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है. हाटगम्हरिया एवं मनोहरपुर प्रखंड के दो मरीजों का अनुभव आयुष चिकित्सा सेवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है.

हाटगम्हरिया प्रखंड निवासी 52 वर्षीय श्री दिनेश कुमार गुप्ता लंबे समय से मधुमेह की समस्या से जूझ रहे थे. करीब 20 वर्षों से मधुमेह के साथ उन्हें हाथ-पैर में दर्द एवं सुन्नपन, पेशाब में जलन, अत्यधिक भूख लगना, गैस एवं पेट संबंधी परेशानी, चक्कर आना, तेजी से वजन कम होना तथा आंखों की रोशनी धुंधली होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. पूर्व में उन्होंने एलोपैथिक चिकित्सा के माध्यम से उपचार कराया. बाद में मार्च 2024 से आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बलंडिया, हाटगम्हरिया में आयुष चिकित्सा के तहत उपचार प्रारंभ कराया. यहां आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. यशवंती कुमारी की देखरेख में उपचार के साथ उन्हें खान-पान, नियमित दिनचर्या, पैदल चलने तथा समय-समय पर मधुमेह की जांच कराने संबंधी आवश्यक परामर्श दिया गया. नियमित उपचार एवं चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के बाद श्री गुप्ता के स्वास्थ्य में लगातार सुधार देखने को मिला. उनके अनुसार मधुमेह अब नियंत्रण में है तथा पैरों में होने वाला दर्द और सुन्नपन भी काफी कम हो गया है. नियमित सुबह-शाम टहलने से उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से बेहतर महसूस होता है. स्वास्थ्य में सुधार के बाद उन्होंने आयुष चिकित्सा के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए अन्य लोगों को भी चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार उपचार लेने के लिए प्रेरित किया.
एक सप्ताह में उर्मिला शुक्ला को मिलने लगी राहत
मनोहरपुर प्रखंड के मुनी आश्रम निवासी 76 वर्षीय श्रीमती उर्मिला शुक्ला करीब एक माह से गैस की समस्या से परेशान थीं. इसके कारण उन्हें चक्कर आने के साथ हाथ-पैर में दर्द एवं जलन की शिकायत भी थी. जुलाई 2026 में उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मनोहरपुर में उपचार प्रारंभ कराया. आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. राधिका कुमारी द्वारा होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के तहत उनका उपचार किया गया. उपचार के साथ उन्हें मसालेदार भोजन से परहेज, पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन तथा नियमित योग करने की सलाह दी गई. श्रीमती शुक्ला के अनुसार उपचार शुरू होने के लगभग एक सप्ताह के भीतर ही गैस की समस्या में कमी आने लगी. इसके साथ हाथ-पैर में होने वाली जलन एवं दर्द में भी राहत मिली. नियमित उपचार एवं चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने के बाद उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां समाप्त हो गईं. वर्तमान में वह स्वयं को स्वस्थ महसूस कर रही हैं और आयुष उपचार से मिले लाभ को लेकर संतुष्ट एवं प्रसन्न हैं.
DC ने क्या कहा
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिले में आयुष चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक इन सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जिला प्रशासन का विशेष जोर है. आयुष्मान आरोग्य मंदिर इस दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर चिकित्सकीय परामर्श भी उतना ही महत्वपूर्ण है. आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से लोगों को उनके नजदीकी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सराहनीय पहल है. जिले के नागरिक इन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते हुए अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनें.”

