मानव तस्करी के खिलाफ न्याय सिर्फ रेस्क्यू तक सीमित न रहे, पुनर्वास और पुनर्समावेशन जरूरी: हाईकोर्ट

न्यायिक अकादमी में मानव तस्करी एवं मानवाधिकार पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित, दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन Ranchi: मानव तस्करी के मामलों...

न्यायिक अकादमी में मानव तस्करी एवं मानवाधिकार पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित, दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन

Ranchi: मानव तस्करी के मामलों में न्याय की अवधारणा केवल पीड़ित को मुक्त कराने और आरोपी के अभियोजन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पीड़ितों के संपूर्ण पुनर्वास, सामाजिक पुनर्समावेशन और उन्हें दोबारा तस्करी के जाल से बचाने पर भी उतना ही जोर देना आवश्यक है. यह बात झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश-सह-कार्यकारी अध्यक्ष (झालसा) न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने न्यायिक अकादमी, झारखंड द्वारा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में कही.

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने मानव तस्करी से जुड़ी जटिल चुनौतियों और उनके समाधान पर प्रकाश डाला.कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय, न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी और न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने भी पीड़ित-केंद्रित न्याय व्यवस्था पर जोर दिया. वक्ताओं ने कहा कि तस्करी से बचाए गए बच्चों को सक्रिय अधिकार-धारक माना जाए और उन्हें प्रभावी विधिक सहायता, चिकित्सा, गवाह संरक्षण, मुआवजा व आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जाएं.

तस्करी से बचे पीड़ितों ने सुनाई आपबीती, जजों ने किया सम्मानित

सम्मेलन के दौरान मानव तस्करी से बचाए गए पीड़ितों ने अपनी आपबीती साझा की, जिससे रेस्क्यू के बाद भी जीवन में आने वाले संघर्षों का मानवीय पहलू सामने आया. न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय व अन्य न्यायाधीशों ने पीड़ितों को सम्मानित किया और शिक्षा के माध्यम से उनके पुनर्वास को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई. विशेष सत्र में एनडीआरएफ के पूर्व महानिदेशक डॉ. पी.एम. नायर, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रचना त्यागी व मधुलिका मोहता तथा एडीजी मनोज कौशिक व किरण पासी ने कानूनी अड़चनों और कार्यप्रणालियों पर विचार रखे.

दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन

कार्यक्रम में मानव तस्करी के ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित “The Legal Landscape of Human Trafficking and Landmark Judgements” तथा हिरासत में मौतों की जांच संबंधी एसओपी “Custodial Deaths: Violation of Human Rights” का विमोचन किया गया. अंत में न्यायिक अकादमी के निदेशक राजेश शरण सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया.
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